रिपोर्ट: ओम साहू
जगदलपुर, बस्तर | ड्रग इंस्पेक्टर सौरभ जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के डेढ़ माह बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मामला केवल विभागीय लापरवाही का नहीं, बल्कि एक नागरिक की प्रतिष्ठा, व्यवसाय और पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बन चुका है।
14 जुलाई को कलेक्टर से की गई पुनः शिकायत
14 जुलाई 2025 को जिला कलेक्टर श्री एस. हरीश को फोन के माध्यम से पुनः निवेदन किया गया कि ड्रग इंस्पेक्टर ऑनलाइन आवेदन के बाद मनमानी कमी बताकर फाइल रोक देते हैं। कलेक्टर ने कहा था:
> “आप पहले ऑनलाइन आवेदन कर दीजिए, फिर मैं शॉर्टआउट कर पाऊंगा।”
साहब मामला आवेदन का नि पैसा का है ? अगर पैसे दे दे तो आवेदन खुद करते है आपके इंस्पेक्टर और लाइसेंस जारी हो जाता है
16 जुलाई को आवेदन, 27 को निरीक्षण
16 जुलाई को फाइल संख्या CT/RL/F19/2025/01660 से ऑनलाइन आवेदन किया गया और व्हाट्सएप के माध्यम से कलेक्टर को भेजा गया। 27 जुलाई को ड्रग इंस्पेक्टर सौरभ जैन ओम मेडिकल एंड एजेंसी का निरीक्षण करने आए लेकिन ब्लैंक पेपर, कार्बन मांगे और फार्मासिस्ट को देखकर बिना कोई निरीक्षण रिपोर्ट दिए चले गए। कहा:
> “मैं घर जाकर रिपोर्ट दे दूंगा।”
29 जुलाई को धमकी और मनमानी
29 जुलाई को दोबारा आए इंस्पेक्टर जैन ने कहा –
> “तुम दो जगह के प्रोप्राइटर नहीं हो सकते।”
जब उन्हें बताया गया कि यदि पहले से जानकारी होती तो सुधार कर लिया जाता, तब उन्होंने धमकी भरे अंदाज़ में कहा:
> “पत्रकारिता कर लो या मेडिकल चला लो… तुम्हारी वजह से ऊपर से लेटर आ रहा है, तुम्हें देख लूंगा। एप्लिकेशन कैंसिल कर दूंगा, घूमते रहोगे।”
40 हजार दो तो सब क्लियर
यह भी चर्चा में है कि यदि कोई आवेदक 40,000 रुपये दे देता है, तो कोई नियम लागू नहीं होता और कोई ‘कमी’ भी नहीं निकलती। लेकिन पैसा न देने वालों के लिए अधिकारी कठोर नियमपालक बन जाते हैं।
अब लोकायुक्त से न्याय की उम्मीद
कलेक्टर और आयुक्त को शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होने से निराश होकर, अब ओम साहू ने अपने आत्मसम्मान और भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई को अगले स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के लोकायुक्त सचिव को इस पूरे मामले की जांच और कार्यवाही हेतु शिकायत पत्र भेजा है।
सवाल वही है: सुशासन बनाम कुशासन ?