नई दिल्ली। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 26A, 41, 42 और 43 में संशोधन लागू कर दिए हैं। जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत ये बदलाव 13 जून 2025 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुए हैं। इसके लिए सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान सचिवों एवं स्वास्थ्य सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे आवश्यक कार्रवाई और क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
नए प्रावधानों के तहत:
अब राज्य सरकारों और विभाग प्रमुखों को “न्यायानिर्णय अधिकारी” नियुक्त करना अनिवार्य होगा। ये अधिकारी फार्मेसी एक्ट के उल्लंघन से संबंधित शिकायतें प्राप्त करेंगे, कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे और दोषी पाए जाने पर जुर्माना लगाएंगे। वसूला गया जुर्माना संबंधित स्टेट फार्मेसी काउंसिल के खाते में जमा होगा।
पंजीकृत फार्मासिस्टों के लिए बड़ी राहत:
कोई भी पंजीकृत फार्मासिस्ट अब तय प्रारूप पर फार्मेसी एक्ट की उल्लंघना की शिकायत कर सकता/सकती है। इसके लिए एक मानक शिकायत प्रारूप तैयार किया गया है जो पारदर्शिता को बढ़ावा देगा और अनाधिकृत फार्मेसी प्रैक्टिस पर रोक लगाएगा।
महत्वपूर्ण बिंदु:
संशोधित नियम फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की वेबसाइट के Rules/Regulations & Syllabus सेक्शन में उपलब्ध हैं।
शिकायतों की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने इस विशेष जानकारी को जनहित में जारी किया है।
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✅ फार्मेसी क्षेत्र से जुड़े सभी पंजीकृत फार्मासिस्टों से अपील है कि वे नियमों की जानकारी लें और जरूरत पड़ने पर अधिकारपूर्वक कार्रवाई करें।
रिपोर्ट: ओम साहू