रायपुर | 14 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act) को लेकर एक अहम और नज़ीर बनने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी चयनित उम्मीदवारों की निजी जानकारी को सूचना के अधिकार के तहत देना अनिवार्य नहीं है।


⚖️ क्या है पूरा मामला?

यह मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से संबंधित है, जहां एक अभ्यर्थी द्वारा RTI के तहत चयनित उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज मांगे गए थे।

राज्य सूचना आयोग ने पहले यह जानकारी देने का आदेश दिया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।


🏛️ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि —

  • चयनित उम्मीदवार अभी सरकारी सेवक नहीं होता
  • वह एक निजी व्यक्ति की श्रेणी में आता है
  • उसकी व्यक्तिगत जानकारी उसकी निजता का हिस्सा है
  • जब तक बड़ा जनहित सिद्ध न हो, जानकारी साझा नहीं की जा सकती

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता है, न कि किसी व्यक्ति की निजता में अनावश्यक हस्तक्षेप


📌 RTI के दुरुपयोग पर चेतावनी

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी केवल चयन प्रक्रिया को चुनौती देने के उद्देश्य से निजी जानकारी मांगता है, तो यह RTI कानून की मंशा के विपरीत माना जाएगा।


📰 फैसले का व्यापक असर

  • भर्ती प्रक्रियाओं में निजता की स्पष्ट सीमा तय
  • RTI कानून के दायरे पर कानूनी स्पष्टता
  • उम्मीदवारों की व्यक्तिगत जानकारी को कानूनी संरक्षण

कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला आने वाले समय में भर्ती से जुड़े RTI मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।


रिपोर्ट: ऋषभ कुमार
प्रबंध संपादक – CG Pahat News
जगदलपुर, बस्तर (छत्तीसगढ़)
📞 संपर्क: 9926750985

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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