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जगदलपुर, बस्तर में शराब की कीमतों में ओवररेटिंग का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। छत्तीसगढ़ के पहट अखबार ने बीते शुक्रवार को आबकारी विभाग से जुड़ी एक खबर प्रकाशित की थी, जिसमें जगदलपुर के अंग्रेजी शराब दुकान कंगोली के संचालक और सेल्समेन पर तय मूल्य से 20 से 40 रुपये अधिक वसूलने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। यही नहीं, थोक में शराब बेचकर कोचियों को फायदा पहुंचाने और बिना बैच नंबर व बिना MRP के शराब बेचने की बात भी सामने आई थी।
आज इस खबर को चार दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। सवाल यह उठता है कि आबकारी विभाग के अधिकारी सब जानते हुए भी चुप क्यों बैठे हैं? क्या सच में इस खेल में कोई बड़ी सेटिंग हुई है, जिसके कारण जांच अधिकारी भी आंख मूंदे बैठे हैं?
शराब दुकान पर लगातार लूट, विभाग मौन क्यों?
शराब प्रेमियों का कहना है कि कंगोली शराब दुकान के मैनेजर और सेल्समेन लगातार अधिक कीमत पर शराब बेच रहे हैं। शिकायत करने पर भी अधिकारी कोई एक्शन लेने के बजाय लिखित शिकायत और कोर्ट का चक्कर लगाने की सलाह दे रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुकी है, और उड़नदस्ता टीम को जांच के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई और वास्तविक समस्या को नजरअंदाज कर दिया गया।
आखिर जांच में क्या छिपाने की कोशिश की जा रही है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आम जनता को शराब की ओवररेटिंग साफ दिखाई दे रही है, तो फिर जांच अधिकारी को यह गड़बड़ी क्यों नहीं दिखी? क्या वाकई में विभाग की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग की मिलीभगत के बिना यह संभव ही नहीं है। विभाग के अधिकारी ही अवैध शराब बिक्री को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि उनकी “ऊपरी कमाई” बनी रहे। यही कारण है कि MRP नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
भाजपा सरकार में कौन कर रहा है सेटिंग?
छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले को लेकर पहले ही जांच जारी है, जिसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन अब सवाल उठता है कि भाजपा सरकार में भी ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारी क्यों सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं?
शहर के चौक-चौराहों पर यह चर्चा आम हो चुकी है कि लगातार शिकायतों के बावजूद अधिकारी चुप क्यों बैठे हैं? क्या कंगोली शराब दुकान पर कार्रवाई करने से कोई बड़ा राज़ खुलने का डर है? क्या यह पूरी तरह से एक संगठित रैकेट है, जिसे विभाग के बड़े अधिकारी चला रहे हैं?
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
इस मामले को लेकर बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी के शहर जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि जिले में शराब की ओवररेटिंग की शिकायतें लगातार आ रही हैं। उन्होंने जिला आबकारी अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
आबकारी विभाग की मिलीभगत से ही ओवररेटिंग और बिना MRP शराब बेची जा रही है।
भाजपा सरकार ने कवासी लखमा को झूठे आरोपों में फंसाकर जेल भेज दिया, लेकिन अब खुद शराब माफिया की भूमिका में आ चुकी है।
मध्यप्रदेश से अवैध शराब मंगाकर छत्तीसगढ़ में बेची जा रही है, जिसमें अधिकारी खुद शामिल हैं।
उन्होंने कलेक्टर से इस मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की है और कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदर्शन किया जाएगा।
130 MRP का क्वार्टर 150 में, 210 वाली बीयर 250 में
यह स्पष्ट है कि शराब दुकानों पर खुलेआम लूट मची हुई है। ग्राहक अगर बिल मांगते हैं तो उन्हें बिल तक नहीं दिया जाता, और मजबूरी में उन्हें मनमानी कीमत पर शराब खरीदनी पड़ती है।
क्या बस्तर में शराब माफिया सरकार से भी ताकतवर?
अब बड़ा सवाल यह है कि—
1. आखिर आबकारी विभाग शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
2. भाजपा सरकार क्या अपने ही अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी, या इसे भी नजरअंदाज किया जाएगा?
3. क्या जांच अधिकारी किसी बड़े खेल को छुपाने में लगे हैं?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है, या फिर बस्तर के आदिवासी शराब प्रेमी इसी तरह लूटते रहेंगे।