रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

28 जून 2026, जगदलपुर, छत्तीसगढ़। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) जिला जगदलपुर के जिला पदाधिकारियों एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं की बैठक लोहंडीगुड़ा के गढ़िया में आयोजित की गई। बैठक में संगठन की मजबूती, किसानों की वर्तमान समस्याओं, पर्यावरण संकट तथा कृषि से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी प्रवीण क्रांति, प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही तथा बीजापुर जिलाध्यक्ष साम्बय्या धंनूर विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता सोमारू ठाकुर ने की।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रभारी प्रवीण क्रांति ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकारें कॉर्पोरेट घरानों के साथ मिलकर जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय “अमृतकाल” नहीं बल्कि “लूटकाल” बन चुका है, जिसके विरुद्ध किसानों, मजदूरों और मेहनतकश जनता को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के हसदेव से लेकर बस्तर तक कॉर्पोरेट हितों के लिए पर्यावरण का लगातार विनाश किया जा रहा है, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है और जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक दुष्प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है। वर्षा आधारित खेती वाले सुकमा जैसे जिले आज सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं, जो पर्यावरणीय असंतुलन का गंभीर परिणाम है।
प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि यदि भारत सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते के तहत किसानों के हितों की अनदेखी करती है और कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियां लागू करती है, तो भारतीय किसान यूनियन इसका पुरजोर विरोध करेगी तथा देशव्यापी आंदोलन चलाने से पीछे नहीं हटेगी।
उन्होंने प्रदेश में उर्वरक संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि खाद की कृत्रिम किल्लत पैदा की जा रही है और थोक उर्वरक विक्रेताओं द्वारा बड़े पैमाने पर कालाबाजारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 18 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार खरीफ 2026 में किसानों को पिछले खरीफ सीजन 2025 में वितरित यूरिया की 80 प्रतिशत तथा डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा ही देने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवहार में प्रति एकड़ दो बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी का मानक अपनाया जा रहा है, जिससे एक एकड़ से कम भूमि वाले किसानों को डीएपी नहीं मिल रही है, जबकि अधिक भूमि वाले किसानों को भी आवश्यकता से काफी कम उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे खेती करना कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों में उर्वरकों का अभाव है, जबकि निजी थोक विक्रेताओं के गोदाम भरे पड़े हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन को तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
बीजापुर जिलाध्यक्ष साम्बय्या धंनूर ने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों और किसानों की समस्याओं का मुकाबला करने के लिए संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संकटों से निपटने के लिए प्रकृति और मानव के बीच सहअस्तित्व के संबंध को मजबूत करना समय की आवश्यकता है तथा प्रत्येक गांव में किसान संगठन का विस्तार किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने किसानों के अधिकारों, वर्षो से काबिज भूमि का मालिकाना पट्टा देने, वनोपज पर आश्रित किसानों को सीधा लाभ प्रदान करने परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने, पर्यावरण संरक्षण और कृषि संकट के समाधान, तुंगल जलशय से सिंचाई के लिए पानी के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने तथा आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया। संगठन के निम्न पदाधिकारियों को पद नियक्ति कर संगठन को मजबूत बनाने का मजबूत करने का जिमा उठाया
जिसमें संभागीय अध्यक्ष शिवा स्वर्णकार बस्तर जिला बस्तर, रमेश गोयल ग्रामीण जिला अध्यक्ष, जगदू राम कश्यप जिला उपाध्यक्ष, अनिल सिंह धीरेन्द्र ठाकुर मान सिंह ,बलिराम पुजारी, जयंत राम साहू , सोनू राम कश्यप शुभम सिंग आदि उपस्थित रहे।