रिपोर्ट – ऋषभ कुमार

3 जुलाई 2026, जगदलपुर। हाल ही में सोशल मीडिया एवं विभिन्न समाचार माध्यमों में बस्तर सांसद के खेत में हल चलाने की तस्वीरें व्यापक रूप से प्रचारित की जा रही हैं। खेती करना निश्चित रूप से सम्मानजनक कार्य है और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सराहनीय है, लेकिन बस्तर की जनता आज यह सवाल पूछ रही है कि किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए अब तक कौन-से ठोस और प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

बस्तर का किसान आज भी खाद और बीज की समय पर उपलब्धता, सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था, फसल का उचित मूल्य, समर्थन मूल्य पर खरीदी, वन्य जीवों से फसलों की सुरक्षा तथा ग्रामीण सड़कों और कृषि सुविधाओं जैसी अनेक मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। किसानों की इन गंभीर समस्याओं का समाधान केवल खेत में हल चलाकर फोटो खिंचवाने से नहीं होगा, बल्कि ठोस नीतियों, प्रभावी योजनाओं और ज़मीनी कार्यों से ही संभव है।

इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के बस्तर जिला उपाध्यक्ष भुवनेश्वर कश्यप* ने कहा कि जनता अब केवल प्रचार और फोटोशूट की राजनीति नहीं, बल्कि विकास, जवाबदेही और परिणाम देखना चाहती है। सांसद का दायित्व केवल प्रतीकात्मक रूप से खेत में उतरना नहीं, बल्कि किसानों के हितों की रक्षा करना, उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रभावी पहल करना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना तथा कृषि से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर गंभीर प्रयास करना है।

उन्होंने कहा कि बस्तर का किसान देश का अन्नदाता है और उसके नाम पर प्रचार करना उचित नहीं है। यदि वास्तव में किसानों के प्रति संवेदनशीलता है तो उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। जनता जनप्रतिनिधियों का मूल्यांकन प्रचारात्मक तस्वीरों से नहीं, बल्कि उनके कार्यों, निर्णयों और किसानों के जीवन में आए वास्तविक बदलाव से करेगी।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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