रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

मत्स्य पालन विभाग की योजना बनी आर्थिक सशक्तिकरण का आधार, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

बीजापुर, 28 जुलाई 2026/
शासन की मत्स्य पालन योजनाएं ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय में वृद्धि करने का सशक्त माध्यम बन रही हैं। बीजापुर जिले की श्रीमती मदनूबाई तलाण्डी, पति श्री गोविंद तलाण्डी, इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से मछलीपालन व्यवसाय अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी सफलता का उदाहरण प्रस्तुत किया है।

मदनूबाई तलाण्डी ने अपनी 1.00 हेक्टेयर निजी भूमि पर मत्स्य पालन विभाग की योजना के तहत 60 प्रतिशत अनुदान का लाभ लेकर तालाब का निर्माण कराया। तालाब निर्माण के बाद उन्होंने नियमित रूप से वैज्ञानिक तरीके से मछलीपालन शुरू किया, जिससे आज वे प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।

मत्स्य पालन विभाग द्वारा समय-समय पर उपलब्ध कराए गए तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और योजनाओं के लाभ से उनके उत्पादन एवं आय में लगातार वृद्धि हो रही है। विभाग के सहयोग से उनका मत्स्य व्यवसाय निरंतर विस्तार कर रहा है और वे आत्मविश्वास के साथ इस क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

मछलीपालन से प्राप्त नियमित आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है। आज उनका परिवार आत्मनिर्भर और खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है। श्रीमती मदनूबाई तलाण्डी की यह सफलता दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का सही उपयोग और परिश्रम से ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

मदनूबाई तलाण्डी की उपलब्धि जिले के अन्य किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और मत्स्य पालकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है तथा उन्हें स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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