रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 08 सितम्बर 2026/ राज्य शासन के श्रम विभाग द्वारा संचालित ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों की श्रमिक महिलाओं के जीवन में खुशहाली और आर्थिक सुरक्षा की एक नई सुबह लेकर आई है। मातृत्व के सम्मान और नवजात शिशुओं के बेहतर पोषण व स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर चलाई जा रही इस योजना ने जमीनी स्तर पर जरूरतमंद परिवारों को एक मजबूत संबल प्रदान किया है। उक्त सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए सीधे बैंक खातों में अंतरित करने से प्रसूता महिलाओं के लिए प्रसव के बाद की चिंताओं को दूर करने में बेहद कारगर साबित हो रही है।



     इस पारदर्शी व्यवस्था का सीधा असर बस्तर जिले के सुदूर गांवों में साफ दिखाई दे रहा है। विकासखंड बकावंड के ग्राम सोनपुर निवासी श्रीमती बालिका के जीवन में दूसरी संतान के आगमन पर यह योजना आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बनी। खाते में सीधी मदद पहुंचते ही प्रसूति के बाद जच्चा और बच्चा दोनों के खान-पान तथा जरूरी स्वास्थ्य देखभाल की दिक्कतें समाप्त हो गईं। शासन-प्रशासन का आभार जताते हुए उन्होंने बताया कि इस सहयोग से उन्हें अपने नवजात की समुचित देखभाल में बहुत बड़ी राहत मिली है।

     योजना का ऐसा ही सकारात्मक प्रभाव बास्तानार विकासखंड के ग्राम बड़े किलेपाल में भी देखने को मिला, जहां कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली पंजीकृत श्रमिक रेशमा पोयाम के लिए यह पहल उम्मीद की नई किरण बनी। पहले बच्चे के जन्म के समय आर्थिक तंगी के चलते लालन-पालन को लेकर आशंकित रेशमा को जब 20 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता मिली, तो उनके परिवार का तनाव दूर हो गया। इस आर्थिक मदद ने रेशमा को मातृत्व के दौरान जरूरी पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाने में सक्षम बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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