रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

जगदलपुर,17 सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिन बस्तर में सेवा और संवेदना की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसमें एक नन्हे बच्चे के जीवन में इलाज के बाद लौटी रोशनी ने अभियान के संदेश को सार्थक रूप में सामने रखा।
जगदलपुर मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित, ग्राम के एक निवासी 4 वर्षीय सिद्धांत बघेल, पिता भूकंप बघेल, जन्म से ही दृष्टिबाधित था। उसे जन्मजात मोतियाबिंद की समस्या थी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिरायु टीम के मेडिकल ऑफिसर डॉ. रमाशंकर चतुर्वेदी, बच्चे को बेहतर उपचार के लिए अपने साथ रायपुर लेकर गए, जहाँ उपचार के बाद अब सिद्धांत सामान्य रूप से देख पा रहा है।
सेवा संकल्प अभियान के प्रथम दिन 17 सितंबर को डॉ. चतुर्वेदी सिद्धांत के घर पहुँचे और बच्चे से मुलाकात कर उसके स्वास्थ्य एवं दृष्टि की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान बच्चे की माता दयमती बघेल ने बताया कि उपचार के बाद अब उनका बेटा देख पा रहा है। बच्चे को सामान्य रूप से देखकर परिवार के चेहरे पर खुशी और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया।
इस पूरे प्रसंग को सेवा संकल्प अभियान के ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की भावना से भी जोड़ा जा रहा है। जिस दीये का अर्थ अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना है, उसी तरह सिद्धांत के जीवन में उपचार के बाद दृष्टि का लौटना उसके परिवार के लिए वास्तविक रोशनी का अनुभव है। एक ओर दीपक अंधकार दूर करने का प्रतीक है, तो दूसरी ओर बच्चे की आँखों में लौटी रोशनी सेवा और संवेदना की सार्थकता को दर्शाती है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित चिरायु व्यवस्था में बच्चों में जन्मजात एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार उन्हें उच्च स्तरीय उपचार के लिए रेफर किया जाता है। छत्तीसगढ़ में चिरायु कार्यक्रम के माध्यम से जन्मजात मोतियाबिंद सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चों को उपचार के लिए रेफर किए जाने के उदाहरण दर्ज हैं।
सिद्धांत की कहानी यह संदेश देती है कि सेवा केवल किसी एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि किसी के जीवन में अंधकार से प्रकाश की ओर बदलाव लाने का संकल्प भी हो सकती है। सेवा संकल्प अभियान के संदर्भ में सिद्धांत के घर पहुँची चिरायु टीम की यह मुलाकात इसी मानवीय भावना की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है।