रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

बस्तर में बायोफ्लॉक तकनीक से बदली तस्वीर
जगदलपुर, 19 सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ के वनांचल अब केवल पारंपरिक कृषि तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर ग्रामीण अंचलों में आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी जा रही है। इसी जमीनी बदलाव की हकीकत जानने और मत्स्य कृषकों का उत्साहवर्धन करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष आनंद निषाद बस्तर जिले के सघन प्रवास पर पहुंचे। अपने भ्रमण के दूसरे दिन उन्होंने विकासखण्ड दरभा के ग्राम तीरथगढ़ का रुख किया, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अब महिला सशक्तिकरण और उन्नत मत्स्य पालन के एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहाँ उन्होंने महिला मत्स्यपालक कृषक  पुरनी बाई द्वारा संचालित ‘बायोफ्लॉक’ पॉन्ड लाइनर आधारित मछली पालन परियोजना का स्थलीय अवलोकन किया।

इस दौरान निषाद ने श्रीमती पुरनी बाई के साथ बायोफ्लॉक तकनीक अपनाने से उत्पादन और आय में आए सकारात्मक बदलावों, विभागीय अनुदान व तकनीकी मार्गदर्शन की सुलभता तथा मछली के चारे और बाजार व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। चर्चा के दौरान श्रीमती पुरनी बाई ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से कम स्थान और सीमित पानी में भी मछलियों का बेहतर विकास संभव हो पा रहा है, जिसके लिए उन्होंने शासन की कल्याणकारी योजनाओं और विभागीय सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।

              महिला कृषक के साहस और परिश्रम की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री निषाद ने कहा कि श्रीमती पुरनी बाई बस्तर की अन्य महिलाओं के लिए एक सशक्त प्रेरणास्रोत हैं। जब ग्रामीण महिलाएं आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो इससे न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा गांव प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

            अपने भ्रमण के उपरांत उन्होंने मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बायोफ्लॉक, केज कल्चर और पॉन्ड लाइनर जैसी उन्नत योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक अनिवार्य रूप से पहुंचे। साथ ही उन्होंने मत्स्य कृषकों को निरंतर तकनीकी प्रशिक्षण देने, उन्हें मजबूत बाजार व्यवस्था से जोड़ने और मछुआ समुदाय के उत्थान के लिए संचालित सभी विभागीय योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने पर बल दिया।वहीं उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की नीतियां केवल कागजों तक सीमित न रहकर बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में भी धरातल पर साकार हो रही हैं और ग्रामीणों के जीवन स्तर में ठोस सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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