PLGA और मिलिशिया प्लाटून के सदस्य हथियार डाल मुख्यधारा में लौटे
✍️ रिपोर्ट: ओमप्रकाश साहू | Chhattisgarh k pahat News
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बीजापुर, छत्तीसगढ़ —
बस्तर में चल रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन को आज बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर में ₹23 लाख के इनामी 13 कुख्यात हार्डकोर माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का ऐलान किया है।
सरेंडर करने वाले माओवादी PLGA, पार्टी यूनिट, LOS और मिलिशिया के सक्रिय सदस्य थे, जिनमें महिला नक्सली भी शामिल हैं।
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कौन-कौन शामिल है आत्मसमर्पण में?
नाम पद इनाम (₹) वर्ष से सक्रिय
प्रमिला मुचाकी कंपनी 02 पार्टी सदस्य 8 लाख 2019
कोसा ओयाम ACM, धमतरी-गरियाबंद डिवि. 5 लाख 2009
कोसी पोड़ियाम KAMS अध्यक्ष 2 लाख 2017
सम्मी सेमला PLGA सदस्य 1 लाख 2015
छोटू परसीक पार्टी सदस्य 1 लाख 2012
मोती ताती पार्टी सदस्य 1 लाख 2014
सुनिता हेमला LOS सदस्य 1 लाख 2019
मंजुला कुंजाम पार्टी सदस्य 1 लाख 2020
सायबो पोड़ियाम PLGA सदस्य 1 लाख 2024
हुंगी उण्डम PLGA सदस्य 1 लाख 2020
मंगा मड़कम मिलिशिया प्लाटून सदस्य — 2000
बुधराम कोडमे मिलिशिया प्लाटून — 2003
जमली कोडमे KAMS सदस्य — 2006
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क्यों हो रहे हैं आत्मसमर्पण?
➡️ पुलिस कैंपों का दबाव:
बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में तेजी से सुरक्षा कैंप खुलने से नक्सल नेटवर्क हिल गया है।
➡️ सरकार की प्रभावी नीति:
“आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025” और “नियद नेल्लानार योजना” ने नक्सलियों को आशा की नई राह दिखाई है।
➡️ विकास का असर:
अब माओवादी खुद कह रहे हैं –
“हिंसा का रास्ता नहीं, विकास ही भविष्य है।”
➡️ पुनर्वास पैकेज:
सरेंडर करने वाले माओवादियों को ₹50,000 की नकद सहायता, स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग और समाज में पुनर्स्थापन का अवसर दिया जा रहा है।
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नक्सल मोर्चे पर ताजा आंकड़े (1 जनवरी 2025 से अब तक)
गिरफ्तारी: 270 माओवादी
आत्मसमर्पण: 241
मुठभेड़ में ढेर: 126
नकद सहायता: ₹50,000 प्रति सरेंडर
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“नियद नेल्लानार योजना” बनी गेमचेंजर
इस योजना के अंतर्गत न सिर्फ आत्मसमर्पण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पहुंचाई जा रही हैं। बस्तर अब शांति, सुरक्षा और समृद्धि की राह पर है।
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吝 भविष्य की दिशा
️ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और
️ गृहमंत्री श्री अमित शाह जी की रणनीति से
सरकार का लक्ष्य है:
“मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समूल उन्मूलन!”
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“बस्तर बदल रहा है, अब नक्सल नहीं विकास की गूंज है!”