डेरी गड़ाई रस्म संपन्न – मां दंतेश्वरी के रथ निर्माण की हुई शुरुआत

 जगदलपुर, 05 सितंबर 2025/
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व की दूसरी प्रमुख रस्म ‘डेरी गड़ाई’ आज पूरे धार्मिक उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई।
यह रस्म बस्तर दशहरा की तैयारियों का एक अहम पड़ाव है, जिसके साथ ही आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की परिक्रमा हेतु रथ निर्माण की औपचारिक शुरुआत हो गई।

 प्रमुख अतिथि एवं उपस्थिति

इस अवसर पर –
⭐ सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप
⭐ विधायक श्री किरण देव
⭐ महापौर श्री संजय पांडे
⭐ कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह
⭐ कलेक्टर श्री हरिस एस
⭐ जिला पंचायत सीईओ श्री प्रतीक जैन

सहित जनप्रतिनिधि, मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेंबर-मेंबरिन और भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

 डेरी गड़ाई रस्म की परंपरा

बिरिंगपाल गांव से लाई गई साल की पवित्र टहनियों को सिरहासार में विशेष विधि से गाड़ा गया।

मंत्रोच्चार, वाद्य यंत्रों की ध्वनि और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

यह रस्म रथ निर्माण की अनुमति का प्रतीक मानी जाती है।

 हल्दी खेलने की परंपरा

इस अवसर पर महिलाओं ने एक-दूसरे पर हल्दी छिड़ककर उत्सव की खुशी बांटी।
यह परंपरा –
✨ उत्साह बढ़ाने
✨ सामाजिक समरसता
✨ सांस्कृतिक एकता
का प्रतीक मानी जाती है।

 रथ निर्माण की शुरुआत

रथ निर्माण का कार्य झाड़ उमरगांव और बेड़ा उमरगांव के संवरा जाति के कारीगरों द्वारा किया जाएगा।

यह निर्माण पूरी तरह पारंपरिक तकनीक और औजारों से किया जाता है, आधुनिक उपकरणों का उपयोग नहीं होता।

यह न केवल कारीगरी की उत्कृष्टता बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।

 आकर्षण का केंद्र

बस्तर दशहरा का रथ मां दंतेश्वरी की शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण होता है।

हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।

साथ ही देश-विदेश के सैलानी भी इस अद्भुत पर्व के साक्षी बनते हैं।

 बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं बल्कि बस्तर की संस्कृति, आस्था और सामुदायिक एकता का जीवंत उत्सव है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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