
🌸 काछनगादी पूजा विधान में काछनदेवी ने दी निर्विघ्न बस्तर दशहरा पर्व मनाने की अनुमति 🌸
📍 जगदलपुर, 21 सितम्बर 2025/
विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का एक महत्वपूर्ण काछनगादी पूजा विधान रविवार को सम्पन्न हुआ।
👉 इस पूजा में मिरगान समाज की कुंवारी कन्या काछनदेवी के स्वरूप में कांटों के झूले पर सवार होकर, बस्तर दशहरे के निर्विघ्न आयोजन की अनुमति प्रदान करती हैं।
🌿 काछनदेवी ने कांटों के झूले में झूलकर दी अनुमति 🌿
बस्तर दशहरा पर्व की प्रमुख रस्म काछनगादी विधान में, इस वर्ष 10 वर्षीय बच्ची पीहू दास पर सवार होकर काछनदेवी ने बेल के कांटों से बने झूले में झूलकर दशहरे के निर्विघ्न आयोजन की अनुमति और आशीर्वाद प्रदान किया।
🙏 इस अवसर पर बस्तर के माटी पुजारी श्री कमलचंद भंजदेव ने देवी से अनुमति मांगी।
✨ कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि –
- वन मंत्री श्री केदार कश्यप
- सांसद एवं अध्यक्ष बस्तर दशहरा समिति श्री महेश कश्यप
- विधायक श्री किरण देव
- महापौर श्री संजय पांडे
- कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी, कलेक्टर श्री हरिस एस, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
🌺 काछनगादी रस्म का महत्व 🌺
👉 बस्तर दशहरे की शुरुआत काछनगादी विधान से ही होती है।
मान्यता है कि रण की देवी काछनदेवी आश्विन अमावस्या को पनका जाति की एक कुंवारी कन्या पर अवतरित होती हैं और बस्तर दशहरे को सफल बनाने की अनुमति देती हैं।
⚡ इस दौरान भंगाराम चौक स्थित काछनगुड़ी को फूलों और रोशनियों से सजाया गया था।
जैसे ही देवी ने झूले पर लेटकर अनुमति दी, पूरा क्षेत्र
🌟 “जय मां दंतेश्वरी” के नारों और भव्य आतिशबाजी से गूंज उठा।
🙏 गोल बाजार में रैला देवी की पूजा 🙏
रविवार शाम को जगदलपुर गोल बाजार में रैला देवी की पारंपरिक पूजा भी संपन्न हुई।
इस अवसर पर –
- परंपरागत मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेंबर-मेंबरिन
- जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी
- बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और इस अनोखे पर्व का हिस्सा बने।
🌸 बस्तर दशहरा : सामाजिक समरसता का प्रतीक 🌸
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग का अद्भुत उदाहरण है।
इसमें हर समाज को अलग-अलग जिम्मेदारियाँ दी जाती हैं, जिसे वे पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाते हैं।
📢 रिपोर्ट: ओम साहू
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