रायगढ़। संत गुरु घासीदास मेडिकल कॉलेज में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया! प्रसव पीड़ा से कराहती एक महिला को इमरजेंसी में अस्पताल लाया गया, जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन साहू ने जांच के बाद पाया कि डिलीवरी तत्काल करानी होगी। लेकिन मामला तब और चौंकाने वाला बन गया जब महिला ने Cojoined Twins (आपस में जुड़े जुड़वां शिशु) को जन्म दिया।

मेडिकल साइंस के लिए दुर्लभ मामला

डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने देखा कि नवजात शिशु आपस में जुड़े हुए थे—ऐसे मामले को चिकित्सा विज्ञान में थोरैकोपैगस ट्विन्स कहा जाता है। हर 50,000 डिलीवरी में से एक ऐसा मामला होता है, जिसमें अधिकांश शिशु जीवित नहीं बच पाते।

डॉक्टरों की तेजी ने बचाई माँ की जान

सबसे बड़ी चुनौती थी—प्रसव के दौरान माँ की जान बचाना! क्योंकि महिला ने गर्भावस्था के छह महीने तक कोई मेडिकल चेकअप नहीं कराया था। बावजूद इसके, डॉ. साहू और उनकी टीम ने करिश्माई प्रदर्शन करते हुए सफल नॉर्मल डिलीवरी कराई और महिला की जान बचा ली।

दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन प्रेरणादायक मामला

हालांकि, जन्म के तुरंत बाद ही दोनों नवजात मृत पाए गए, लेकिन डॉक्टरों की कुशलता और तत्परता ने माँ को एक नया जीवन दिया। यह मामला मेडिकल कॉलेज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया है और डॉक्टरों की मेहनत की मिसाल पेश करता है।

मेडिकल जगत के लिए अनोखी घटना

ऐसे दुर्लभ मामलों में सर्जरी से पहले ही मृत्यु दर अधिक होती है, लेकिन रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने इस जटिल केस को बिना ऑपरेशन, पूरी तरह नॉर्मल डिलीवरी से संभाला, जो किसी चमत्कार से कम नहीं!

यह मामला न सिर्फ मेडिकल साइंस के लिए एक सीख है, बल्कि डॉक्टरों के समर्पण की गवाही भी देता है!

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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