रिपोर्ट ओम साहू
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि संस्कृति और संगीत भी इसमें बड़ा रोल निभा रहे हैं। बस्तर पुलिस के तेजतर्रार एएसपी महेश्वर नाग का हल्बी गीत ‘ सुना दादा हो’ इस मुहिम में नया जोश भर रहा है। यह गीत नक्सल प्रभावित इलाकों में तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों को शांति व विकास की राह पर चलने के लिए प्रेरित कर रहा है।
महेश्वर नाग का हल्बी गीत ‘ सुना दादा हो’ क्यों बना जन-जन की आवाज?
लोकप्रिय गायक और पुलिस अधिकारी महेश्वर नाग द्वारा गाया गया ‘सुना दादा हो’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है। इस गाने के जरिए नक्सल प्रभावित लोगों की पीड़ा को उजागर किया गया है और यह संदेश दिया गया है कि हिंसा का कोई समाधान नहीं है, बल्कि शांति और विकास ही सही रास्ता है। बस्तर में यह गीत न केवल युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब ट्रेंड कर रहा है।
महेश्वर नाग: बस्तर पुलिस का नया चेहरा, जो हथियार से ज्यादा संस्कृति से बना हीरो!
महेश्वर नाग वर्तमान में एएसपी, जगदलपुर के पद पर तैनात हैं। वे न केवल एक कुशल और तेजतर्रार पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि लोकसंस्कृति और कला के भी बड़े प्रेमी हैं। उनकी इंसानियत और मददगार प्रवृत्ति ने उन्हें आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। नक्सल उन्मूलन के इस नए तरीके से बस्तर पुलिस की सकारात्मक छवि सामने आ रही है, जिससे आम जनता का भरोसा और मजबूत हो रहा है।
सुना दादा हो’ बना सोशल मीडिया सेंसेशन! आप भी सुनें और शेयर करें!
अगर आप भी इस जनचेतना अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो महेश्वर नाग का यह गीत जरूर सुनें और इसे अपने दोस्तों, परिवार और सोशल मीडिया पर शेयर करें।
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बस्तर पुलिस की इस नई पहल को समर्थन दें और नक्सल उन्मूलन के इस अभियान में अपनी भागीदारी निभाएं। ‘ सुना दादा हो’ को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और सकारात्मक बदलाव का हिस्सा बने !