रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

पूर्व की तरह स्वयं के व्यय पर स्थानांतरण की सुविधा बहाल करने और ट्रांसफर विंडो खोलने छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने किया अनुरोध


पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की तर्ज पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध शिथिल करने और व्यापक हित में निर्णय लेने की अपील

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र खण्डेलवाल ने राज्य सरकार से प्रदेश के समस्त विभागों में लंबे समय से स्थानांतरण पर लगे प्रतिबंध (बैन) को तुरंत शिथिल करने

और वर्ष 2025-26 की स्थानांतरण नीति में मानवीय पक्षों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन करने का सादर अनुरोध किया है। संघ का कहना है कि राज्य में लंबे समय से तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध होने के कारण लाखों अधिकारी-कर्मचारी गंभीर पारिवारिक समस्याओं, वृद्ध माता-पिता की देखरेख, स्वयं या परिवार की गंभीर बीमारियों और पति-पत्नी के अलग-अलग जिलों में पदस्थ होने के कारण भारी मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।


24 वर्षों की परंपरा को नई नीति में किया गया समाप्त, 16 हजार कर्मचारी प्रभावित


जिलाध्यक्ष राजेन्द्र खण्डेलवाल ने बताया कि राज्य गठन के बाद से पिछले लगभग 24 वर्षों की स्थानांतरण नीतियों में एक स्पष्ट और जनहितैषी प्रावधान शामिल था।

इसके तहत संभाग व जिला स्तर के पदों (जैसे- फार्मासिस्ट, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, ड्रेसर, सहायक ग्रेड-03 आदि) के कर्मचारी स्वयं के खर्च पर राज्य स्तर पर स्थानांतरण करा सकते थे।

वर्ष 2025 की नीति में इस प्रावधान का उल्लेख न होने के कारण प्रदेश के लगभग 16,000 स्वास्थ्य कर्मचारी इस न्यायसंगत सुविधा से पूरी तरह वंचित हो गए हैं।


मध्य प्रदेश सरकार के फैसले का दिया संदर्भ, छत्तीसगढ़ में भी खुले ‘ट्रांसफर विंडो’


खण्डेलवाल ने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश सरकार के हालिया फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि वहां कैबिनेट के द्वारा वर्ष 2026 की नई तबादला नीति को मंजूरी देकर जून महीने में सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध हटा दिया गया है।

इसी मानवीय व व्यावहारिक दृष्टिकोण की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार को भी प्रदेश के कर्मचारियों के व्यापक हित में तुरंत ‘ट्रांसफर विंडो’ खोलनी चाहिए। यदि कोई कर्मचारी अपने स्वयं के व्यय पर गृह जिले में जाना चाहता है, तो उसे इसकी अनुमति मिलने से शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा।


9 जून की कैबिनेट बैठक से उम्मीद, पिछली बार की तरह न हो न्याय से वंचित

संघ ने माननीय मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों से विनम्रतापूर्वक मांग की है कि आगामी 9 जून को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस संवेदनशील विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। जिलाध्यक्ष ने कहा कि पिछली बार इस नियम की अनुपस्थिति और कड़े प्रतिबंध के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने गृह जिले जाने से वंचित रह गए थे। इस बार कोई भी कर्मचारी इस सुविधा से वंचित न रह पाए, इसके लिए कैबिनेट बैठक में प्रतिबंध हटाने और नीतिगत संशोधन को मंजूरी दिया जाना बेहद आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का पूर्ण विश्वास है कि यह नीतिगत सुधार न केवल कर्मचारियों के हित में होगा, बल्कि वे अधिक मानसिक शांति और पूर्ण समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित कर सकेंगे।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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