5 लाख की उधारी पर 1 करोड़ की मांग, 900% ब्याज!
छत्तीसगढ़ में अपराधियों का साम्राज्य क्यों फैलता जा रहा है?

रिपोर्ट: ओम साहू

Raipur छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ की शांत धरती पर इन दिनों अपराध की जड़ें तेजी से फैल रही हैं। यूपी-बिहार जैसे राज्यों से आए कुख्यात अपराधियों के गिरोह अब इस राज्य में आर्थिक आतंक फैलाने लगे हैं। स्थानीय लोगों को मामूली उधारी देकर बाद में उनसे करोड़ों की वसूली की जा रही है—वो भी 900 प्रतिशत तक के अवैध ब्याज के साथ!

पीड़ित की आपबीती:
एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसने मजबूरी में एक व्यक्ति से 5 लाख रुपये उधार लिए थे। कुछ महीनों के भीतर ही उस पर 1 करोड़ रुपये लौटाने का दबाव बना दिया गया। ब्याज की दर इतनी ऊंची थी कि महीने-दर-महीने कर्ज बढ़ता ही गया। जब उसने रकम चुकाने से इनकार किया, तो जान से मारने की धमकी, गाड़ी तोड़फोड़ और घर के बाहर हथियारबंद लोगों का डेरा डाल दिया गया।

बाहरी अपराधियों का जाल:
इन घटनाओं में एक खास बात सामने आ रही है—अधिकतर अपराधी छत्तीसगढ़ के निवासी नहीं हैं। ये लोग उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से आकर यहां जड़े जमा चुके हैं। धीरे-धीरे इन्होंने छत्तीसगढ़ की आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था को अपने शिकंजे में ले लिया है।

प्रशासन मौन, जनता त्रस्त:
प्रशासन की चुप्पी अब कई सवाल खड़े करती है:

क्या सरकार को इन घटनाओं की जानकारी नहीं है?

या फिर इन अपराधियों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?

छत्तीसगढ़ के मूल निवासी आखिर कब तक वंचित, पीड़ित और असहाय बने रहेंगे?


कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह:
जब एक आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से जी रहा है और अचानक उसे ऐसे अपराधियों के शिकंजे में डाल दिया जाता है, तो इसका जिम्मेदार कौन है? पुलिस की निष्क्रियता और नेताओं की चुप्पी ने इन माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

छत्तीसगढ़ियों से अपील:
अब वक्त आ गया है कि हम सब एकजुट हों।

ऐसे लोगों की पहचान करें और खुलकर नाम उजागर करें।

पीड़ितों को आगे लाएं और प्रशासन को मजबूर करें कार्रवाई के लिए।

सोशल मीडिया, समाचार माध्यमों और जनआंदोलनों के ज़रिए इस अपराध जाल को उजागर करें।


छत्तीसगढ़ किसी का “शोषण स्थल” नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक गर्व की भूमि है। इसे अपराधियों के कब्जे में नहीं जाने दिया जा सकता।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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