नई दिल्ली/रायपुर/जगदलपुर। केंद्र और छत्तीसगढ़ – दोनों जगह भाजपा की सरकार, और इसके बीच “सुषासन तिहार – 2025” का आयोजन। लेकिन इस आयोजन के बीच जो शिकायतों और मांगों का सैलाब सामने आया, उसने सरकार के ‘सुषासन’ दावे को सवालों के कटघरे में ला खड़ा किया है।

समाधान शिविरों में सच्चाई का सामना
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित “सुषासन तिहार – 2025” के अंतर्गत बस्तर जिले में 05 मई से 31 मई 2025 तक समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। उद्देश्य – आम जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान करना।

लेकिन हकीकत यह है कि 4 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक चले शिकायत संग्रहण अभियान में 1,11,985 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें

1,11,695 मांगें

और 290 शिकायतें दर्ज की गईं।

इनमें से अब तक 94,146 मांगों और 96 शिकायतों का समाधान किया गया है, जबकि बाकी बचे हज़ारों आवेदन अब समाधान शिविरों के भरोसे हैं।

जनता की प्रमुख मांगें – सरकार के कामकाज पर सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना: 48,385 आवेदन

राशन कार्ड: 12,181 आवेदन

अन्य: पेंशन, उज्ज्वला योजना, श्रमिक कार्ड, विधवा व वृद्धावस्था पेंशन, प्रमाण पत्र, सड़क/पुल निर्माण, जल निकासी, वनाधिकार पट्टा आदि।

क्या यही है सुषासन का असली चेहरा?

जनता का सवाल वाजिब है –
जब सरकार अपनी है, योजनाएं वर्षों से घोषित हैं, बजट भी जारी है – तो फिर हर साल समाधान शिविर लगाकर समस्याएं क्यों हल करनी पड़ रही हैं?

भ्रष्टाचार पर कोई अंकुश नहीं – अधिकारी बेखौफ, जनता लाचार
गांव-गांव में शिकायतें हैं – आवास के लिए पैसा मांगा गया, राशन कटता रहा, पेंशन महीनों से नहीं मिली। जनता का गुस्सा साफ है – हम योजनाओं के हकदार हैं, पर लुटे जा रहे हैं।

क्या समाधान शिविर ‘सिस्टम की विफलता’ का इवेंट बन गए हैं?

सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा –

योजनाएं कागजों से जमीन तक क्यों नहीं पहुंच रही?

अधिकारी लापरवाह क्यों हैं?

और जनता को हर योजना के लिए बार-बार आवेदन क्यों करना पड़ रहा है?

जनता अब सिर्फ सुनवाई नहीं, कार्रवाई चाहती है।
वरना सुषासन पर्व की जगह अगली बार जनता सड़कों पर उतरकर ‘कुशासन का पर्दाफाश’ करेगी।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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