रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

      बस्तर में ‘सुरक्षित मातृत्व’ का नया अध्याय

जगदलपुर, 21 अप्रैल 2026/ बस्तर के सुदूर वनांचलों और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित मातृत्व की संकल्पना को साकार करने के लिए जिला प्रशासन ने तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का एक अभूतपूर्व सेतु तैयार किया है। कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के विशेष मार्गदर्शन में जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए दो महत्वपूर्ण मोर्चों पर काम किया जा रहा है, जो बस्तर की गर्भवती माताओं के लिए किसी ‘वरदान’ से कम नहीं है।

        इस मुहिम के पहले चरण में आर्थिक बाधाओं को दूर करते हुए ‘हाई रिस्क प्रेगनेंसी’ की सटीक पहचान के लिए निःशुल्क अल्ट्रासोनोग्राफी की सुविधा सुनिश्चित की गई है। इसके लिए प्रशासन ने एक स्मार्ट रणनीति के तहत शहर के प्रतिष्ठित निजी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ अनुबंध किया है, ताकि वनांचलों की माताओं को आधुनिक नैदानिक सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इस पहल की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 148 गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा चुकी है, जिनमें अकेले 20 अप्रैल को 72 महिलाओं को इस सुविधा का लाभ मिला। इस व्यवस्था से न केवल गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि समय रहते चिकित्सीय जटिलताओं का पता लगाकर मातृ मृत्यु दर में कमी लाने का लक्ष्य भी हासिल किया जा रहा है।



        स्वास्थ्य सेवाओं के इसी विस्तार को डिजिटल मजबूती देने के लिए जिला प्रशासन और यूनिसेफ़ के साझा प्रयासों से महारानी अस्पताल में ‘रेड (रिचिंग एवरी डिलिवरी) कॉल सेंटर’ की शुरुआत की गई है। इस केंद्र का शुभारंभ अत्यंत संवेदनशील ढंग से एक नवजात शिशु की माता के हाथों करवाकर प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि ये तमाम योजनाएं सीधे तौर पर माताओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए समर्पित हैं। “हरिक मांय, हरिक पिला” (खुश मां, खुश बच्चा) के संकल्प के साथ संचालित यह हाई-टेक सेंटर विशेष रूप से उन महिलाओं की निगरानी कर रहा है जिनकी गर्भावस्था 7 से 9 माह के बीच है।

      केंद्र के प्रतिनिधि प्रतिदिन 35 से 40 महिलाओं से सीधा संवाद कर उन्हें संस्थागत प्रसव के फायदों के प्रति जागरूक कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जान रहे हैं। प्रशासन की यह दूरगामी योजना केवल प्रसव तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि सुरक्षित प्रसव के बाद भी अगले 30 दिनों तक माँ और नवजात शिशु के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। इस दौरान डिजिटल और संबंधित स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से नियमित फॉलो-अप लिया जाता है ताकि प्रसव पश्चात होने वाली किसी भी संभावित स्वास्थ्य संबंधी जटिलता का त्वरित निदान किया जा सके। बस्तर विकासखंड से लेकर दरभा, बकावंड और नानगुर जैसे क्षेत्रों तक फैली यह व्यवस्था अब धरातल पर दिखने लगी है। स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीक का यह अनूठा संगम बस्तर में एक ऐसे सुरक्षित भविष्य की बुनियाद रख रहा है, जहाँ हर प्रसव सुरक्षित होगा और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे।

संपादक –ऋषभ कुमार

मो.–6266449977

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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