रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 22 अप्रैल 2026/ बचपन की कोमल सीख जब प्रकृति के सानिध्य में परवान चढ़ती है, तो भविष्य की नींव बेहद मजबूत और टिकाऊ हो जाती है। इसी भावना को साकार करते हुए हाल ही में ‘तितली संस्था’ के सहयोग से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद प्रभावी और रोचक गतिविधि का आयोजन  जिले के चयनित 120 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर किया गया। इस दौरान इन आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रांगण में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला, जहाँ नन्हे-मुन्ने बच्चों को किताबी ज्ञान से परे व्यावहारिक रूप से प्रकृति के करीब लाया गया।



           आंगनबाड़ी केंद्रों में इस विशेष सत्र के दौरान बच्चों को यह सिखाया गया कि जिस कचरे को हम बेकार समझकर फेंक देते हैं, वह वास्तव में प्रकृति के लिए ‘काला सोना’ यानी खाद बन सकता है। बच्चों ने बड़े ही कौतूहल के साथ सूखी पत्तियों और फल-सब्जियों के छिलकों को एकत्रित किया और उनकी मदद से घर पर ही प्राकृतिक खाद (कम्पोस्ट) बनाने की कला सीखी। इस पूरी प्रक्रिया को बच्चों ने खुद अपने हाथों से अंजाम दिया, जिससे उन्हें यह समझ विकसित हुई कि कचरे का सही प्रबंधन न केवल हमारे परिवेश को स्वच्छ रखता है, बल्कि हमारी धरती को और अधिक हरा-भरा और उपजाऊ बनाने में भी मदद करता है।

       आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और संस्था के साझा प्रयासों से आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश स्पष्ट किया कि यदि बच्चों को बचपन से ही कचरे के सदुपयोग और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए, तो वे पर्यावरण के सच्चे रक्षक बन सकते हैं। इस पहल ने न केवल बच्चों को खाद बनाने की तकनीक सिखाई, बल्कि उनके भीतर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और जुड़ाव का एक सुंदर भाव भी पैदा किया। ‘सीख भी और स्वच्छता भी’ के इस अनूठे संगम ने यह साबित कर दिया कि छोटे-छोटे कदमों से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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