रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 13 जून 2026/ राज्य शासन के निर्देशानुसार समूचे प्रदेश के साथ ही बस्तर संभाग के भी सभी शासकीय विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 का आगाज उत्साहजनक माहौल में होने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मंशानुसार मंगलवार 16 जून से संभाग के सभी स्कूलों में भव्य ‘शाला प्रवेश उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए बस्तर संभाग के शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए सभी मातहत जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और प्राचार्यों को युद्धस्तर पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस अभियान को ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहरी वार्डों तक एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप देने के लिए स्थानीय स्तर पर पारंपरिक तरीके से मुनादी कराई जा रही है, ताकि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समितियों और पालकों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही बच्चों के स्वागत से पहले स्कूलों की सूरत बदलने की कवायद भी शुरू हो गई है, जिसके तहत संयुक्त संचालक ने सभी स्कूल परिसरों, कक्षाओं और शौचालयों की व्यापक साफ-सफाई करने तथा जर्जर या मरम्मत योग्य स्कूल भवनों का काम 15 जून तक हर हाल में पूरा करने निर्देशित किया है, ताकि जब बच्चे पहले दिन स्कूल पहुंचें तो उन्हें आकर्षक वातावरण मिल सके।

           विभाग द्वारा स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया को बेहद सुगम  बनाने की दिशा में कक्षा पहली में आँगनबाड़ी केन्द्रों की सूची के आधार पर बच्चों का सीधा प्रवेश कराया जाएगा, वहीं प्राथमिक शालाओं से उत्तीर्ण होने वाले पांचवीं के छात्रों को टीसी के आधार पर सीधे छठवीं कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। इस अभियान के दौरान बस्तर संभाग में ड्राप आउट बच्चों को ढूंढकर दोबारा स्कूलों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्कूलों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है और सभी विषय शिक्षकों को आगामी तीन महीनों का अग्रिम शैक्षणिक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

            शाला प्रवेश उत्सव के पहले दिन स्कूल की दहलीज पर कदम रखने वाले नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर और आरती उतारकर आत्मीय स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद पात्र छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, स्कूल गणवेश और साइकिलों का वितरण किया जाएगा, जबकि बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले होनहार विद्यार्थियों और उनके पालकों को मंच पर सम्मानित भी किया जाएगा। इस पूरे आयोजन में स्थानीय समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्व-सहायता समूहों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सहयोग लिया जा रहा है, और आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे स्वेच्छा से बच्चों को स्लेट, पेंसिल, कॉपी और स्कूल बैग जैसी सामग्रियां दान कर सकते हैं। शिक्षा विभाग द्वारा जिलों को पहले से उपलब्ध स्थानीय संसाधनों और जन-सहयोग के माध्यम से ही इसे संपन्न कराना होगा। कार्यक्रम के सुचारू संचालन और अकादमिक स्तर की निगरानी के लिए स्वयं संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मिशन समन्वयक जैसे आला अधिकारी लगातार स्कूलों का सतत निरीक्षण करेंगे।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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