रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

मैंगो महोत्सव 2.0′ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी


कलेक्टर ने किसानों और आम के प्रसंस्कृत उत्पादों की स्टॉल लगाने वाले प्रतिभागियों को किया सम्मानित


जगदलपुर, 14 जून 2026/ बस्तर अंचल की समृद्ध जैव-विविधता और अद्वितीय कृषि संपदा को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से जगदलपुर के क्रांतिकारी डेबरीधुर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र परिसर में दो दिवसीय भव्य ‘बस्तर आम महोत्सव 2026’ का गरिमय आयोजन संपन्न हुआ। इस महोत्सव ने न केवल क्षेत्र के पारंपरिक और हाइब्रिड आमों के अनूठे संसार को प्रदर्शित किया, बल्कि स्थानीय किसानों और युवाओं के हुनर को भी एक नई पहचान दी। महोत्सव के समापन सत्र के मुख्य अतिथि कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने वहां लगाई गई प्रदर्शनी का आत्मीयता से अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी में शामिल आम की विविध और दुर्लभ प्रजातियों को बेहद रुचि के साथ देखा और बस्तर की इस समृद्ध प्राकृतिक विविधता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं द्वारा आम से तैयार किए गए विभिन्न मूल्य वर्धित उत्पादों की गुणवत्ता को भी सराहा और इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहतरीन प्रयास बताया। समापन समारोह के दौरान उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता किसानों और आम के प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे अचार, अमचूर, पना और मैंगो पल्प की स्टॉल लगाने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया।


इस सफल आयोजन के बीच प्रशासन ने भविष्य की एक और बड़ी कार्ययोजना की नींव रख दी है। पहले संस्करण की शानदार सफलता के बाद अब बस्तर में “मैंगो महोत्सव 2.0” के दूसरे संस्करण की भव्य तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। कलेक्टर द्वारा इस महोत्सव को आने वाले समय में एक ‘राष्ट्रीय महोत्सव’ के रूप में स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि बस्तर को आम के क्षेत्र में देश-दुनिया में एक प्रमुख और विशिष्ट स्थान दिलाया जा सके। इस आगामी राष्ट्रीय स्तर के आयोजन को लेकर पूरी टीम बेहद सक्रिय है और सभी आवश्यक पहलुओं को सुनिश्चित करने में जुटी है, जहां देश भर के आम उत्पादक किसान, उपभोक्ता, व्यापारी, खरीदार और विक्रेता एक ही मंच पर एकत्रित होंगे।


अपने उद्बोधन में कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने कृषि में स्थिरता, स्वास्थ्य और जैविक प्रमाणन के महत्व पर विशेष जोर दिया। पंजाब और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि दूसरी हरित क्रांति के दौरान रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से फैली हैं, जिससे सबक लेते हुए आज के समय में रसायन-मुक्त और प्राकृतिक खेती की सख्त जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि बस्तर में प्राकृतिक और जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं, जिसके लिए हमें कृषि में आधुनिक तकनीकों, जैव-कीटनाशकों और ‘श्री विधि’ जैसी उन्नत प्रणालियों को अपनाना होगा ताकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।


स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के संदर्भ में कलेक्टर श्री छिकारा ने किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना और उनके सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया। उनका मानना है कि जब कृषक किसान उत्पादक संगठनों के रूप में संगठित होकर बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करेंगे, तभी बड़े खरीदार और निर्यातक सीधे बस्तर की ओर आकर्षित होंगे। बस्तर के आमों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए उन्होंने दूरगामी रणनीति साझा करते हुए कहा कि केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रहकर आम जैसी बागवानी फसलों और पशुपालन को एकीकृत कृषि प्रणाली के तहत जोड़कर फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना होगा।

इसके साथ ही उत्पादों को रासायनिक-मुक्त प्रमाणित कर उनकी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए जैविक प्रमाणन बेहद जरूरी है, जिसके बाद प्रभावी ब्रांडिंग और विपणन के जरिए बस्तर के इस अनूठे स्वाद को देश के बड़े शहरों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया जा सकता है। यह दो दिवसीय महोत्सव बस्तर के कृषि इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जो स्थानीय किसानों को पारंपरिक पद्धतियों के साथ आधुनिक और सुरक्षित तकनीकों के समन्वय से आर्थिक रूप से सशक्त होने की एक नई राह दिखाएगा। इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. गणेश नाग सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में किसान, वैज्ञानिक और महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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