रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

जगदलपुर की जलवंतीन लहरे और मृदुला जैन बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
26 जून 2026, जगदलपुर। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, के माध्यम से संचालित प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने शहर के छोटे व्यवसायियों के जीवन में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का संचार किया है। कोविड-19 के कठिन दौर में बंद हुए छोटे कारोबार को फिर से खड़ा करने में यह योजना आर्थिक सहारा बनी। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जगदलपुर की जलवंतीन लहरे और मृदुला जैन की, जिन्होंने संघर्षों से निकलकर अपने व्यवसाय को फिर से स्थापित किया।

ठेला व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं जलवंतीन लहरे
रविन्द्रनाथ टैगोर वार्ड जगदलपुर निवासी श्रीमती जलवंतीन लहरे संजय मार्केट में ठेला लगाकर आलू-प्याज बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। इसी बीच कोविड लॉकडाउन के दौरान बाजार बंद होने से उनका व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो गया और आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई।व्यवसाय को दोबारा शुरू करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 10 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया और फिर से ठेला लगाकर आलू-प्याज विक्रय का कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे बिक्री बढ़ी और आमदनी में सुधार होने लगा। उन्होंने समय पर ऋण की किस्तों का भुगतान किया तथा डिजिटल लेन-देन को भी अपनाया।
जलवंतीन ने योजना के तहत प्राप्त 10 हजार और 20 हजार रुपये के ऋण का सफलतापूर्वक भुगतान किया। वर्तमान में वे 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ा रही हैं। आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर है। वे स्वयं आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लाभों के प्रति जागरूक कर रही हैं।
फल दुकान से जूस सेंटर के सपने तक पहुंचीं मृदुला जैन
शांति नगर वार्ड जगदलपुर निवासी श्रीमती मृदुला जैन नया बस स्टैंड में ठेले पर फल दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। लेकिन कोविड लॉकडाउन के दौरान बसों का संचालन बंद होने से उनका व्यवसाय भी प्रभावित हुआ और परिवार चलाना मुश्किल हो गया।ऐसे समय में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना उनके लिए सहारा बनी। योजना के तहत 10 हजार रुपये का ऋण प्राप्त कर उन्होंने दोबारा फल दुकान शुरू की। ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी और आमदनी में सुधार हुआ। उन्होंने ऋण की राशि समय पर जमा की और बैंकिंग एवं डिजिटल लेन-देन को भी अपनाया।
मृदुला जैन ने 10 हजार रुपये के ऋण का पूरा भुगतान करने के बाद वर्तमान में 20 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया है। बढ़ते व्यवसाय से उत्साहित होकर अब वे अपना जूस सेंटर शुरू करने की योजना बना रही हैं। उनकी आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।
जलवंतीन लहरे और मृदुला जैन की सफलता यह साबित करती है कि सही समय पर मिला आर्थिक सहयोग और मेहनत किसी भी व्यक्ति को आत्मनिर्भर बना सकता है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने छोटे व्यापारियों को न केवल आर्थिक संबल दिया, बल्कि उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर भी प्रदान किया।
दोनों हितग्राहियों ने योजना के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रदेश सरकार एवं स्थानीय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अन्य जरूरतमंद लोगों से भी इस योजना का लाभ लेने की अपील की है।