रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

10 जुलाई 2026, जगदलपुर । बस्तर में कैथलैब जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा का शुभारंभ स्वागतयोग्य है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल को उस निजी अस्पताल से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं महारानी अस्पताल का भी निरीक्षण करना चाहिए था, जहां आज भी बस्तर संभाग के लाखों लोग उपचार के लिए निर्भर हैं।

मेडिकल कॉलेज एवं महारानी अस्पताल में प्रतिदिन हजारों गरीब और दूर-दराज़ के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद मरीजों को लंबी कतारों, डॉक्टरों की कमी, दवाइयों के अभाव, जांच में देरी, वार्डों की अव्यवस्था और अन्य बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

भुवनेश्वर कश्यप, उपाध्यक्ष, बस्तर जिला, इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति ने कहा कि नई स्वास्थ्य सुविधाओं का स्वागत है, लेकिन सरकार की पहली जिम्मेदारी उन सरकारी अस्पतालों को सुदृढ़ करना है, जहां आम और गरीब जनता अपना इलाज कराने पहुंचती है। यदि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के दावे कर रही है, तो उसे निजी अस्पतालों के उद्घाटन के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों की वास्तविक स्थिति का भी ईमानदारी से मूल्यांकन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता केवल नई घोषणाएं नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, दवाइयां, जांच सुविधाएं और सम्मानजनक उपचार चाहती है। जब तक सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार का दावा अधूरा रहेगा।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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