रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 23 जुलाई 2026/ नौकरी की तलाश में भटकते युवाओं की दौड़ से अलग, जब बस्तर का एक युवा खुद का रास्ता चुनने का फैसला करता है, तो सिर्फ एक इंसान की किस्मत नहीं बदलती—बल्कि कई और जिंदगियों को सहारा मिल जाता है। यह कहानी है जगदलपुर के 36 वर्षीय किशन जंगम की, जिन्होंने तंगहाली और सीमित साधनों की बेड़ियों को तोड़कर न केवल अपने सपनों को साकार किया, बल्कि शासन की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की सहायता से स्वरोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भरता की एक अद्भुत मिसाल पेश की है।
किशन ने स्नातक की डिग्री हाथ में आते ही दूसरों के अधीन काम करने के बजाय खुद मालिक बनने का फैसला कर लिया था। प्रिंटिंग की दुनिया में उनका मन हमेशा से रमता था, लेकिन एक नए व्यापार को शुरू करने के लिए पूंजी की जरूरत थी और राहों में वित्तीय चुनौतियों का पहाड़ खड़ा था। निराशा के बादल गहराने लगे थे, पर किशन के इरादे डिगने वाले नहीं थे। इसी बीच उनके एक मित्र ने उन्हें केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (पीएमईजीपी) योजना के बारे में बताया। उम्मीद की एक किरण मिलते ही किशन ने देर नहीं की और जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, जगदलपुर के अधिकारियों के दरवाजे पर जा पहुंचे। योजना की बारीकियों को समझने के बाद किए गए उनके आवेदन के आधार पर वर्ष 2019 में पंजाब नेशनल बैंक जगदलपुर शाखा से उनके लिए 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हो गया, जिसके साथ डेढ़ लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी भी मिली। इस आर्थिक संबल के बल पर जगदलपुर में एफसीआई गोदाम के सामने ‘मेसर्स कार्तिक प्रिंटर सप्लायर्स’ की नींव रखी। मशीनों की स्थापना के साथ ही किशन की मेहनत और लगन ने सकारात्मक परिणाम दिखाना शुरू किया।
किशन कहते हैं कि उनकी सफलता सिर्फ उनके अपने घर तक सीमित नहीं रही। अपनी मेहनत और व्यावसायिक सूझबूझ के दम पर जब उनका प्रिंटिंग का काम फैला, तो उन्होंने यहाँ के 6 स्थानीय युवाओं को अपने साथ जोड़ा और उन्हें सम्मानजनक रोज़गार प्रदान किया। आज जब हर महीने उन 6 परिवारों के घरों में खुशहाली का चिराग जलता है, तो किशन की सफलता की ख़ुशी और अधिक बढ़ जाती है। जिस व्यवसाय की शुरुआत आर्थिक तंगी के साय में हुई थी, आज उसका वार्षिक टर्नओवर 30 से 35 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। किशन जंगम ने न केवल अपनी तकदीर बदली है, बल्कि वे आज बस्तर के उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा की एक जीती-जागती मिसाल बन चुके हैं, जो संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर थक हार जाते हैं। किशन बताते हैं कि वह स्वयं भी अपने परिचित युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करते हैं।