रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

नक्सली हिंसा के दर्द से आत्मनिर्भरता तक का सफर
बीजापुर 07 अगस्त 2026- ग्राम तालनार, विकासखंड भैरमगढ़ की निवासी जोगी कश्यप ने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए अपने परिवार के लिए नई उम्मीद की राह बनाई है। नक्सली हिंसा में पति स्वर्गीय लक्ष्मण कश्यप को खोने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय खेती को ही अपनी आजीविका का आधार बनाया। 51 वर्षीय जोगी कश्यप अपनी 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खरीफ मौसम में धान तथा रबी सीजन में सब्जियों की खेती कर रही हैं।
वर्षों के खेती के अनुभव और अथक मेहनत से वे लगातार उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। कृषि विभाग की योजनाओं से उन्हें महत्वपूर्ण सहयोग मिला। विभाग द्वारा नलकूप खनन कराए जाने से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई, जिससे खेती अधिक सुरक्षित और लाभकारी बन गई। बेहतर सिंचाई व्यवस्था के कारण कृषि उनकी स्थायी आय का स्रोत बनी है।
आज खेती से होने वाली आय के माध्यम से वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं तथा बच्चों की शिक्षा भी सुचारु रूप से संचालित हो रही है। जोगी कश्यप की सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प, मेहनत और सरकारी योजनाओं के प्रभावी सहयोग से आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत की जा सकती है।