रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

मांगें पूरी नहीं हुईं तो चक्काजाम से लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन तक करेगा किसान संगठन — प्रशासन को दी संघर्ष की चेतावनी
जगदलपुर, 10 अगस्त 2026। भारतीय किसान यूनियन टिकैत जिला बस्तर के नेतृत्व में सोमवार को किसानों, ग्रामीणों और आम जनता से जुड़े गंभीर एवं ज्वलंत मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों और ग्रामीणों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि शासन-प्रशासन द्वारा समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो भारतीय किसान यूनियन टिकैत चरणबद्ध आंदोलन करते हुए चक्काजाम, धरना-प्रदर्शन और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने राष्ट्रपति जी के नाम सौंपे ज्ञापन में भारत-अमेरिका ट्रेड डील एवं कृषि क्षेत्र में होने वाले संभावित आयात-निर्यात को लेकर किसानों के हितों पर पड़ने वाले प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि क्षेत्र में विदेशी उत्पादों एवं कृषि यंत्रों का आयात बढ़ने से भारतीय किसानों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ सकती है। सरकार द्वारा किसानों को कृषि यंत्रों एवं कृषि क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी तथा अन्य सुविधाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।
किसान नेताओं ने कहा कि देश का किसान पहले से ही महंगाई, महंगे कृषि इनपुट, खाद-बीज की समस्या, बिजली की बढ़ती लागत और बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में ऐसी व्यापार नीतियां लागू नहीं होनी चाहिए जिनका सीधा या अप्रत्यक्ष नुकसान देश के किसानों को उठाना पड़े।


समर्थन मूल्य को लेकर सरकार को चेतावनी
ज्ञापन में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर भी संगठन ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया। किसान नेताओं ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को अपनी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। यदि समर्थन मूल्य व्यवस्था कमजोर होती है अथवा बाजार में फसलों के दामों में गिरावट आती है तो इसका सबसे बड़ा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा।
संगठन ने मांग की कि किसानों की फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए तथा ऐसी किसी भी नीति को लागू करने से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए। जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान बस्तर की परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को भी ज्ञापन का प्रमुख मुद्दा बनाया। संगठन ने कहा कि बस्तर की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधन यहां के ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज के जीवन का आधार हैं। इनके अधिकारों एवं सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसान यूनियन ने प्रशासन एवं सरकार से मांग की कि ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा की जाए तथा जल-जंगल-जमीन से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों की आवाज को प्राथमिकता दी जाए।
जेलों में बंद ग्रामीणों के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग
राज्यपाल जी के नाम दिए गए ज्ञापन में बस्तर के उन लोगों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया, जिन्हें लंबे समय से नक्सली प्रकरणों में जेल में रखा गया है। संगठन ने मांग की कि ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जाए और जिन लोगों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, उन्हें कानून के अनुसार न्याय दिलाया जाए।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और कानून के शासन के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए।
स्मार्ट मीटर और बढ़े हुए बिजली बिल के खिलाफ किसान यूनियन
ज्ञापन में स्मार्ट मीटर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में वृद्धि की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसान एवं ग्रामीण पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, ऐसे में बिजली के बढ़े हुए बिलों का अतिरिक्त बोझ उन पर डालना उचित नहीं है।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा करने, बढ़े हुए बिजली बिलों की जांच कराने तथा किसानों एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की।
खाद की कालाबाजारी पर भड़का किसान संगठन
बस्तर में खाद की उपलब्धता एवं कथित कालाबाजारी को लेकर भी किसान नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। संगठन ने कहा कि किसानों को खेती के समय पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो रही है, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी एवं निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचे जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
किसान यूनियन ने मांग की कि खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषी व्यापारियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा किसानों को निर्धारित दर पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए।
संगठन ने कहा कि किसान खाद के लिए भटकता रहे और बिचौलिये एवं कालाबाजारी करने वाले लोग किसानों की मजबूरी का फायदा उठाएं, यह किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नल-जल योजना, बिजली और गांवों की मूलभूत सुविधाओं की मांग
“किसान की आवाज दबेगी नहीं, किसान का संघर्ष रुकेगा नहीं—जब तक अधिकार नहीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”