रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

तारलागुड़ा सेक्टर की रितिका ने 1000 रुपये की मासिक सहायता को बनाया आत्मनिर्भरता की पूंजी

बीजापुर, 26 अगस्त 2026/ कहते हैं, मुश्किलें इंसान को तोड़ने आती हैं, लेकिन हौसला उन्हें अवसर में बदल देता है। ग्राम चंदूर की रितिका दोरिवार ने विपरीत परिस्थितियों के बीच संघर्ष करते हुए आज आत्मनिर्भरता की ऐसी कहानी लिखी है, जो दूसरी बहनों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

वर्ष 2019 रितिका के जीवन का सबसे कठिन दौर था, जब उनके पति ने उनका साथ छोड़ दिया। परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। ऐसे समय में उनकी मां ने उनका हाथ थामा, हिम्मत दी और आगे बढ़ने का भरोसा दिलाया। मां के इसी संबल और अपनी मेहनत को रितिका ने अपनी ताकत बनाया।



विष्णु भैया का भेजा 1000 रुपये बना आत्मनिर्भरता का सहारा

छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना रितिका के जीवन में उम्मीद की नई किरण लेकर आई। योजना के तहत मिलने वाली प्रतिमाह 1000 रुपये की राशि को उन्होंने खर्च करने के बजाय धीरे-धीरे बचाना शुरू किया। छोटी-छोटी बचत से तैयार हुई यही राशि आगे चलकर उनकी आत्मनिर्भरता की पूंजी बनी।



रितिका ने इसी बचत के सहारे अपनी छोटी-सी किराना दुकान शुरू की। आज दुकान से होने वाली आमदनी उनके परिवार के जीवन-यापन का सहारा बनी हुई है। अब रितिका किसी पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि स्वयं अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

रितिका भावुक होकर कहती हैं, “वो 1000 रुपये मेरे लिए सिर्फ पैसे नहीं हैं। जब घर में जरूरत बढ़ जाती है, बच्चों की पढ़ाई या राशन की जरूरत होती है, तो विष्णु भैया का भेजा यही 1000 रुपये मेरा सहारा बनता है। इसी राशि को बचाकर मैंने दुकान शुरू करने की हिम्मत जुटाई।”

रितिका की कहानी बताती है कि महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता केवल मासिक सहयोग नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की शुरुआत भी बन सकती है। सही सोच, बचत और मेहनत से छोटी-सी सहायता को भी स्थायी आय के साधन में बदला जा सकता है।

आज रितिका आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब सरकार का सहयोग, परिवार का संबल और महिला का हौसला एक साथ मिलता है, तो परिस्थितियां भी बदलने लगती हैं।

बहनों की तरक्की ही परिवार की शान है, और यही विष्णु भैया का अभिमान है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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