रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता से राशन और दवाइयों की जरूरतें पूरी करने में मिली मदद
बीजापुर, 27 अगस्त 2026/ उम्र के उस पड़ाव पर जब इंसान को अपनों के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, 72 वर्षीय हेमला मल्ले के जीवन में परिस्थितियां इसके बिल्कुल विपरीत थीं। पति स्व. हेमला कोवा के निधन के बाद वे आश्रयहीन हो गई थीं। दैनिक जरूरतों, राशन और दवाइयों की व्यवस्था करना उनके लिए बेहद कठिन हो गया था। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें जीवनयापन के लिए भिक्षावृत्ति का सहारा लेना पड़ा।
ग्राम तर्रेम, जिला बीजापुर की रहने वाली हेमला मल्ले के जीवन में वर्ष 2024 में महतारी वंदन योजना उम्मीद की नई किरण लेकर आई। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली 1000 रुपये की आर्थिक सहायता ने उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में महत्वपूर्ण सहारा दिया।
हेमला मल्ले बताती हैं कि इस राशि से वे अब राशन और दवाइयों का खर्च वहन कर पा रही हैं। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें अपने स्वास्थ्य की देखभाल करने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का भरोसा मिला है।
“अब किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता”
अपने जीवन में आए बदलाव को याद करते हुए हेमला मल्ले भावुक होकर कहती हैं, “महतारी वंदन योजना से मुझे बहुत सहायता मिली है। अब मैंने भिक्षावृत्ति छोड़ दी है और अपने पैरों पर चलने लगी हूं। मुझे अब किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता। यह मेरे लिए भीख नहीं, बल्कि सम्मान का सहारा है। मेरे जीवन में बदलाव लाने के लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं।”
हेमला मल्ले की कहानी यह बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता जरूरतमंद महिलाओं के लिए केवल आर्थिक संबल नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और गरिमापूर्ण जीवन का आधार भी बन सकती है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता ने उनके कठिन दौर में सहारा देकर उन्हें दूसरों पर निर्भरता से बाहर निकलने का अवसर दिया है।
“बहनों की तरक्की ही परिवार की शान, विष्णु भैया का यही अभिमान—महतारी वंदन से सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहचान।”