रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

पुनर्वास केंद्र बीजापुर में पुनर्वासित बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र
भयमुक्त जीवन, आत्मसम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक बना पुनर्वासित युवाओं का पहला रक्षाबंधन
बीजापुर, 28 अगस्त 2026/ कभी हिंसा, भय और अनिश्चितता के साये में जीवन जीने वाले पुनर्वासित युवाओं के लिए इस बार का रक्षाबंधन एक नई जिंदगी के आगाज का उत्सव बन गया। पुनर्वास केंद्र बीजापुर में माओवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके पुनर्वासित भाई-बहनों ने उत्साह, आत्मीयता और उमंग के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। पुनर्वासित बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का संदेश दिया।

यह रक्षाबंधन उनके लिए केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि भय से मुक्ति, आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक बनकर सामने आया। खासकर उन युवाओं के लिए यह पहला रक्षाबंधन विशेष रहा, जिन्होंने माओवाद का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र, शांति और विकास की मुख्यधारा को अपनाया है।

नई जिंदगी में पहला रक्षाबंधन बना यादगार
पुनर्वास केंद्र में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान वातावरण भावनाओं और उत्साह से सराबोर रहा। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, तिलक लगाया और मिठाई खिलाकर उनके सुखद एवं सुरक्षित भविष्य की कामना की। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लिया।

कई पुनर्वासित युवाओं के लिए यह पहला ऐसा रक्षाबंधन था, जिसे उन्होंने डर और हिंसा से दूर, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के वातावरण में मनाया। उनके चेहरों पर दिखाई दे रही खुशी इस बदलाव की गवाही दे रही थी कि जिंदगी को एक नई दिशा मिलने के बाद त्यौहारों की खुशियां भी नए अर्थ के साथ लौट आई हैं।
मुख्यधारा में लौटकर बना रहे हैं शांतिपूर्ण भविष्य
माओवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे इन युवाओं को पुनर्वास नीति के माध्यम से सम्मानजनक जीवन जीने, स्वरोजगार अपनाने, शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़ने और समाज में पुनः स्थापित होने का अवसर मिल रहा है। पुनर्वास केंद्र उनके लिए केवल आश्रय का स्थान नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत का केंद्र बन रहा है।
आज ये युवा हिंसा और भय की दुनिया से बाहर निकलकर परिवार, समाज और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनका यह परिवर्तन बीजापुर में शांति और विश्वास की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार
रक्षाबंधन के अवसर पर पुनर्वासित युवाओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति ने उन्हें अतीत से बाहर निकलकर सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है।
पुनर्वासित युवाओं ने कहा कि आज वे अपने परिवार और समाज के बीच बिना भय के जीवन जी रहे हैं। उनके लिए यह बदलाव किसी नई जिंदगी से कम नहीं है। उन्होंने शासन की ओर से मिले सहयोग और पुनर्वास के अवसर को अपने जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया।
राखी ने दिया शांति और विश्वास का संदेश
इस अवसर पर बंधी राखियां केवल भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने शांति, भाईचारे, विश्वास और सामाजिक पुनर्स्थापना का संदेश भी दिया। जिन हाथों ने कभी हिंसा और भय का रास्ता देखा था, वही हाथ अब राखी के पवित्र धागे से रिश्तों और विश्वास को मजबूत कर रहे हैं।
पुनर्वासित युवाओं का यह रक्षाबंधन इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि जब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलता है, तो जीवन को नई पहचान और नई दिशा दी जा सकती है।
भय से विश्वास तक, हिंसा से विकास तक
पुनर्वास केंद्र बीजापुर में मनाया गया रक्षाबंधन उन युवाओं की बदलती जिंदगी की कहानी कह गया, जिन्होंने माओवाद के अंधेरे को पीछे छोड़कर शांति और विकास की राह चुनी है। उनका पहला रक्षाबंधन आत्मसम्मान, भयमुक्त जीवन और सुखद भविष्य की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया।
राखी के इस पावन पर्व पर पुनर्वासित बहनों का अपने भाइयों की कलाई पर बांधा गया रक्षा सूत्र यही संदेश देता है—
“हिंसा का रास्ता छोड़ा, अपनों का साथ जोड़ा; अब शांति, सम्मान और विकास के साथ नया भविष्य गढ़ना है।”