रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

30 अगस्त 2026, जगदलपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर बस्तर राजमहल में रियासतकाल से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा एक बार फिर देखने को मिली। ग्राम नेतानार, चितापुर और कोलेंग के ग्रामीण परिजन रक्षाबंधन पर जगदलपुर स्थित राजमहल पहुंचे और राजपरिवार के सदस्यों को राखी बांधकर पारंपरिक रिश्ते को निभाया।



बताया जाता है कि रियासतकाल से ही इन ग्रामीण अंचलों और बस्तर राजपरिवार के बीच आत्मीयता एवं पारस्परिक संरक्षण की परंपरा रही है। रक्षाबंधन के दिन ग्रामीणों द्वारा राजमहल पहुंचकर रक्षा सूत्र बांधना इसी ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। बदलते समय के बावजूद यह परंपरा आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है।



राजमहल पहुंचने वाले ग्रामीणों का पारंपरिक रीति रिवाज के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान ग्रामीणों और राजपरिवार के बीच आत्मीय मुलाकात हुई तथा क्षेत्र की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई।



रक्षाबंधन के इस आयोजन ने बस्तर की विशिष्ट सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को भी सामने रखा। यहां राखी का यह पर्व महज भाई बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी विश्वास, सम्मान और संरक्षण की भावना से जुड़े पारंपरिक रिश्तों को भी अभिव्यक्त करता है।



ग्रामीणों का कहना है कि राजमहल में राखी बांधने की यह परंपरा उनके लिए केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूर्वजों से मिली विरासत और बस्तर की ऐतिहासिक संस्कृति से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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