
65 राहत शिविरों में 9282 प्रभावितों को मिला आसरा
जगदलपुर, 27 सितम्बर 2026/ बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से 23 से 26 सितंबर तक लगातार हुई मूसलाधार बारिश और पड़ोसी राज्य ओडिशा के खातीगुड़ा तथा मुरान बांध के फाटक खोले जाने के कारण इंद्रावती नदी में भीषण बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 8.3 मीटर को बहुत पीछे छोड़ते हुए 27 सितंबर की सुबह 6 बजे 12.39 मीटर के अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया, जिससे तटीय और निचले इलाकों में गंभीर जलभराव और संकट खड़ा हो गया। हालांकि सुबह के बाद से जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आने लगी है, जिससे प्रशासन और नागरिकों को आंशिक राहत मिली है।
बाढ़ के इस खतरे को देखते हुए कलेक्टर आकाश छिकारा के नेतृत्व में जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन दलों ने युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। प्रशासनिक सक्रियता के चलते जलमग्न और दुर्गम क्षेत्रों से अब तक कुल 1,215 नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इस सघन बचाव अभियान में रविवार को कोहकापाल से 225, डोंगाघाट से 57, हाउसिंग बोर्ड व बैंक कॉलोनी से 85, डुरकीगुड़ा से 21 तथा पिछले तीन दिनों में 827 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। राहत दल द्वारा आधुनिक संसाधनों का प्रभावी समन्वय देखने को मिला, जहाँ अत्यंत विकट परिस्थितियों में फँसे 12 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट किया गया, वहीं अन्य 1,203 लोगों को रेस्क्यू बोट्स और नावों के माध्यम से सुरक्षित तटों तक पहुँचाया गया।
बाढ़ प्रभावितों को तत्काल आसरा और राहत पहुँचाने के उद्देश्य से जिले भर में कुल 65 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ वर्तमान में 9200 से अधिक प्रभावितों को ठहराया गया है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के शिविरों में इन प्रभावितों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं और जरूरी सामग्रियों का सुचारू प्रबंध सुनिश्चित किया गया है। जलस्तर में आ रही गिरावट के बीच प्रशासनिक टीमें पूरी स्थिति पर लगातार सतत निगरानी रखे हुए हैं और स्वास्थ्य अमला शिविरों में सक्रियता से सेवाएं दे रहा है।