बस्तर विकासखंड के कोलचुर ग्राम पंचायत के खास पारा सिवनागुड़ा संकुल में संचालित प्राथमिक शाला की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक के 40 से 45 बच्चे अध्ययन करते हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई बदइंतजामी की भेंट चढ़ रही है।

जर्जर छत पानी टपकता

 स्थानीय सूत्रों के अनुसार स्कूल भवन के शौचालय में वर्षों से कचरा पड़ा है, जिसकी कभी सफाई नहीं कराई गई। बच्चों और शिक्षकों को मजबूरी में गंदगी के बीच पढ़ाई और दिनचर्या निपटानी पड़ रही है।

 स्कूल की रसोई कक्ष की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि उसमें खाना बनाना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को मजबूरी में अतिरिक्त कक्ष में मिड डे मील बनाना पड़ रहा है। वहीं, पांचवी कक्षा का कमरा भी गिरने की कगार पर है।

 सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर अचानक किसी दिन छत या दीवार गिर गई और कोई हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

 क्या जिम्मेदार अधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग के अधिकारी इस लापरवाही को गंभीरता से लेंगे?
बच्चों की पढ़ाई पहले से ही अव्यवस्थाओं के चलते बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खुले में पढ़ाई कराने या जर्जर भवन में बच्चों को बैठाने से आए दिन हादसे की आशंका बनी रहती है।

 ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं —

शिक्षा विभाग के अधिकारी कब तक मूकदर्शक बने रहेंगे?

स्कूल भवन की मरम्मत और साफ-सफाई की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

बच्चों की पढ़ाई बाधित होने का मुआवजा कौन देगा?

अगर भविष्य में कोई हादसा होता है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी?

 ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल स्कूल भवन की मरम्मत कराई जाए, नियमित सफाई की व्यवस्था हो और बच्चों को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण मिले।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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