🗓 जगदलपुर, 28 जुलाई 2025
✍🏻 रिपोर्ट: ओम साहू

📌 cgpahat न्यूज़ जगदलपुर |
संसद में पेश हुई एक ताज़ा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े उजागर किए हैं। छत्तीसगढ़ देश में आदिवासियों की जमीन पर सबसे ज़्यादा कब्जों वाला राज्य बन गया है।
बस्तर और सरगुजा जैसे संवेदनशील आदिवासी क्षेत्रों में 9 लाख से अधिक दावे पेश किए गए, जिनमें से करीब आधे दावे खारिज कर दिए गए हैं।


🌲 कैसे कब्जा हो रही आदिवासियों की जमीन?

छत्तीसगढ़ में जंगल की जमीन पर कब्जा करने की गैर आदिवासियों में होड़ मची हुई है।

लीज़ के बहाने व्यापारी जमीन हथिया रहे हैं।

आदिवासी को मामूली रकम देकर उसकी जमीन ली जाती है।

फिर उस पर पक्का स्ट्रक्चर बनाकर वन अधिकार का दावा पेश किया जाता है।

इन दावों का ग्रामसभा से लेकर जिला प्रशासन तक सत्यापन होता है।


📊 आंकड़ों में देखें ज़मीन कब्जे का पूरा खेल

विवरण संख्या

कुल दावे 9,47,479
➤ व्यक्तिगत 8,90,220
➤ संगठनों के 57,259
खारिज दावे 4,04,129 व्यक्तिगत + 3,658 संगठन
स्वीकृत पट्टे 5,34,068
➤ व्यक्तिगत 4,81,432
➤ संगठनों को 52,636

📝 आधार: संसद में 31 मई 2025 को पेश रिपोर्ट


🚫 गैर-आदिवासियों का फर्जी दावा और मिलीभगत

कानून के अनुसार आदिवासी जमीन केवल आदिवासी ही खरीद सकता है।
लेकिन रिपोर्ट बताती है कि:

गैर-आदिवासी, आदिवासियों के नाम पर फर्जी दावे कर रहे हैं।

कुछ मामलों में कलेक्टर की अनुमति ली जा रही है, तो कहीं फर्जी पहचान के ज़रिए जमीन हथियाई जा रही है।


🥇 छत्तीसगढ़ बना देश में नंबर वन

छत्तीसगढ़ – 9,47,479 दावे (सबसे अधिक)

ओडिशा – 7,36,172 दावे (1.4 लाख खारिज)

मध्यप्रदेश – 6,27,513 दावे

➡️ इन आंकड़ों से साफ है कि भूमि अधिकार अधिनियम की आड़ में व्यापक स्तर पर जमीन कब्जाने का खेल चल रहा है, जिसमें कई बार प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की भी आशंका जताई जाती है।


📣 ऐसे मुद्दों पर जागरूकता और सख्त निगरानी की जरूरत है ताकि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।

📲 दबंग केशरी न्यूज़ के आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें
🗞️ सच्ची और निर्भीक पत्रकारिता के लिए जुड़े रहिए!

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

Leave a Reply