रिपोर्ट ऋषभ कुमार सम्पादक छत्तीसगढ़ पहट न्यूज
मुख्य बात:सुशासन के दावों के बीच विडंबना— BJP कैबिनेट व वनमंत्री केदार कश्यप के अपने ही गृह क्षेत्र के किसान आज भी पुनर्वास, मुआवजा और कृषि भूमि से वंचित!
जगदलपुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ में सुशासन की बात होती है, लेकिन बस्तर के कोसारटेडा बांध से प्रभावित किसान पिछले 16 वर्षों से अपने वैध हक के लिए भटक रहे हैं। विडंबना यह है कि यह क्षेत्र स्वयं भाजपा कैबिनेट व वनमंत्री केदार कश्यप का गृह इलाका है— फिर भी स्थानीय किसान आज तक पूर्ण मुआवजा, कृषि योग्य पुनर्वास भूमि और वादे के लाभों से वंचित हैं।
कोसारटेडा बांध के कारण सालेमेटा, छुरावण्ड, खड़का, कमेला और बढ़ेकनेरा गांवों के 1000 से अधिक कृषक परिवार विस्थापित हुए थे, लेकिन पुनर्वास प्रक्रिया आज भी अधूरी है।
हाईकोर्ट का साफ आदेश — फिर भी कार्रवाई नहीं!
10 मई 2024: माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने राज्य सरकार को किसानों की मांगों का त्वरित समाधान करने का आदेश दिया।
स्थिति: आदेश लागू नहीं — किसान अब भी राहत के इंतजार में।
किसानों का कहना है कि 2008 में जिन वादों के आधार पर भूमि अधिग्रहित की गई, वे आज तक पूरे नहीं हुए। पुनर्वास समिति की बैठक (08.11.2011) और वर्षों की मांगों के बावजूद सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया।
किसानों का आरोप
- मुआवजा पूरा नहीं दिया गया
- वैकल्पिक कृषि भूमि उपलब्ध नहीं
- पुनर्वास आज तक अधूरा
- स्थानीय नेताओं ने भी समस्या नहीं उठाई
- समिति के सचिव किसान ने बताया: “हमने सोचा था कि मंत्री जी का इलाका है तो समस्या जल्दी हल होगी। लेकिन 16 साल बाद भी हम न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।”
समिति का मुख्यमंत्री से निवेदन
कोसारटेडा विस्थापित जनहित समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल पालन कराया जाए और विस्थापित परिवारों को उनका हक दिलाया जाए।
रिपोर्ट ऋषभ कुमार सम्पादक छत्तीसगढ़ पहट न्यूज