कला और संस्कृति का संगम – ‘बस्तर पंडुम 2025’ का भव्य आयोजन! महेश कश्यप बस्तर का सच्चा सेवक

सुकमा: आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोक कला की जीवंत झलक पेश करता ‘बस्तर पंडुम 2025’ महोत्सव इस वर्ष भी अपनी भव्यता और सांस्कृतिक सौंदर्य से सभी को मंत्रमुग्ध कर गया। इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होकर लोगों ने जनजातीय समाज की समृद्ध धरोहर का साक्षी बनने का गौरव प्राप्त किया।

संस्कृति और एकता का अनूठा संगम
‘बस्तर पंडुम’ केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि यह जनजातीय समुदाय की एकता, आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना का प्रतीक है। यह पर्व हमें न केवल बस्तर की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और लोक नृत्य से जोड़ता है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती भी प्रदान करता है।

जनजातीय परंपराओं पर संवाद और प्रतिबद्धता
इस अवसर पर जनजातीय भाई-बहनों से संवाद कर उनकी परंपराओं, जीवनशैली और सांस्कृतिक धरोहर पर चर्चा की गई। उनके उज्ज्वल भविष्य को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई गई, ताकि उनकी संस्कृति और परंपराएं सहेजी जा सकें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

वरिष्ठ जनों और प्रशासन की भागीदारी
महोत्सव में क्षेत्र के वरिष्ठ जन, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी उपस्थित रहे। सभी ने एकमत से इस तरह के आयोजनों को जनजातीय समाज के उत्थान और उनकी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

‘बस्तर पंडुम’ न केवल बस्तर की पहचान है, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का गौरवशाली प्रतीक भी है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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