रिपोर्ट –जय शंकर पांडे

2 मई 2026, छत्तीसगढ़ के गरियाबंद से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अंधविश्वास और फर्जी इलाज की सच्चाई को बेनकाब कर दिया है। धर्म और डर का सहारा लेकर एक युवती की जान ले ली गई… और अब अदालत ने इस क्रूर खेल पर कड़ा प्रहार किया है। 18 साल की मासूम को ‘चमत्कारी इलाज’ के नाम पर लगातार प्रताड़ित किया गया। बिना किसी मेडिकल योग्यता के आरोपी महिला ने झाड़-फूंक का सहारा लिया, शरीर पर गर्म पानी और तेल डाला, और धार्मिक आस्था के नाम पर दबाव बनाती रही। इलाज नहीं, ये एक सुनियोजित यातना थी… जिसका अंजाम मौत बनकर सामने आया।
रायपुर की विशेष एससी-एसटी अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अन्य धाराओं में भी सख्त दंड दिया गया है। ये फैसला सिर्फ एक सजा नहीं… बल्कि समाज के लिए चेतावनी है—अंधविश्वास और ढोंग के नाम पर अब किसी की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।