रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

वैश्विक पटल पर चमकेगा बस्तर का स्वाद
जगदलपुर, 13 जून 2026/ बस्तर अंचल की समृद्ध जैव-विविधता और पारंपरिक कृषि संपदा को वैश्विक मंच देने के लिए जगदलपुर स्थित क्रांतिकारी डेबरीधुर उद्यानिकी महाविद्यालय परिसर में दो दिवसीय भव्य ‘बस्तर आम महोत्सव 2026’ का शुभारंभ हुआ। महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय (दुर्ग) और उद्यानिकी संचालनालय (रायपुर) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रों से जुटे 1500 से अधिक किसानों की उपस्थिति रही, जो अपने साथ 2000 से अधिक विविध आम की प्रजातियों का विशाल संसार लेकर पहुंचे थे। इस भव्य प्रदर्शनी में किसानों की सक्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के कोने-कोने से आए अन्नदाता अपने साथ पारंपरिक, उन्नत और हाइब्रिड आमों की ढेरों किस्में लेकर आए थे, जिससे पूरा परिसर आम की खुशबू और अनूठी रंगत से सराबोर हो उठा। इस महोत्सव में प्रदर्शित की गईं आम की इन विविध प्रजातियों में विलुप्त हो रही पारंपरिक किस्मों के संरक्षण को प्रमुखता से रेखांकित किया गया, जिसने वैज्ञानिकों और आम प्रेमियों को अचंभित कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने किसानों द्वारा लाई गईं इन हज़ारों प्रजातियों की ‘जीरो-केमिकल’ शुद्धता को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए इसे एक बड़ा वैश्विक प्रीमियम ब्रांड बनाने का विज़न साझा किया। उन्होंने आगामी 2031 तक बस्तर को देश का सबसे उन्नत जनजातीय संभाग बनाने का संकल्प दोहराते हुए ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (पीएम जनमन योजना) के तहत कृषि व उद्यानिकी विकास की योजनाओं की जानकारी दी। इसी कड़ी में क्षेत्रीय विधायक श्री किरण सिंह देव ने प्रदर्शनी में सजे आमों के इस महासंसार और उद्यानिकी के छात्रों द्वारा आम से तैयार किए गए ’56 भोग’ की जमकर सराहना की और इस अद्भुत आयोजन को भविष्य में शहर के मुख्य केंद्र में आयोजित करने का अमूल्य सुझाव दिया। इसके साथ ही जगदलपुर महापौर श्री संजय पाण्डे ने पर्यावरण संतुलन के लिए वृक्षारोपण को एक जनांदोलन बनाने का आह्वान करते हुए आम के धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को सामने रखा।

इस महोत्सव के दौरान तकनीकी और वैश्विक परिदृश्य को सामने रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि आर. सक्सेना ने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के हवाले से वर्ष 2050 तक 1000 करोड़ की आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा, जमीन की घटती उपजाऊ क्षमता और भोजन की बर्बादी जैसे वैश्विक खतरों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने एल नीनो के प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ के किसानों से अपनी कम से कम 25% भूमि पर अनिवार्य रूप से जैविक खेती अपनाने की पुरजोर अपील की और बताया कि रासायनिक खादों से निकलने वाली मीथेन गैस पर्यावरण के लिए कितनी घातक साबित हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक तरीकों से पकाए गए आमों को नेपाल द्वारा रिजेक्ट किया जा चुका है, ऐसे में बस्तर के प्राकृतिक रूप से पके आमों और छत्तीसगढ़ के किसानों के इन उत्पादों की मांग वैश्विक स्तर पर बहुत अधिक है। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए आम से आइसक्रीम, जैम, जेली जैसे उत्पाद तैयार कर ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्य संवर्धन) करने पर विशेष जोर दिया। इस दो दिवसीय महोत्सव ने न केवल आम की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शनी बल्कि रंगोली, पोस्टर मेकिंग और फैंसी ड्रेस जैसी रचनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से किसानों, वैज्ञानिकों और युवाओं को एक अनूठा और प्रेरणादायी मंच प्रदान किया।