रिपोर्ट – जय शंकर पांडे


जगदलपुर 22 जून 2026/ बस्तर जिले को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन और ग्राम पंचायतों ने एक बड़ी मुहिम छेड़ दी है। पूरे देश में 01 अप्रैल 2026 से लागू हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बस्तर जिले की ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को गति देने के लिए ग्राम पंचायत आड़ावाल, चेराकुर, बुरुन्दवाड़ा, बिलोरी और हल्बा कचोरा सहित कई गांवों में जन-जागरूकता चरम पर है, जहां ग्राम पंचायत भवनों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और हाट-बाजारों में दीवार लेखन और ग्राम सभाओं के जरिए ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। दीवारों पर चार डिब्बा चार रंग, स्वच्छता का नया उमंग और हरा, नीला, लाल और काला (या पीला), यही है स्वच्छता का उजाला जैसे आकर्षक नारे लिखे गए हैं जो ग्रामीणों को प्रेरित कर रहे हैं। 



इस नई पहल के तहत ग्रामीणों को अपने घरों से ही कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर डस्टबिन में डालने की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इसके तहत रसोई के कचरे, फल, सब्जी के छिलके और बासी भोजन जैसे गीले कचरे को हरे डस्टबिन में डालने की सलाह दी गई है। वहीं कागज, प्लास्टिक, गत्ता, कांच और बोतल जैसे सूखे कचरे के लिए नीले डस्टबिन का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। सैनिटरी पैड, डायपर, मेडिकल वेस्ट और ब्लेड जैसे सैनिटरी अपशिष्ट को लाल डस्टबिन में तथा खराब बल्ब, ट्यूबलाइट, मोबाइल और चार्जर जैसे हानिकारक ई-वेस्ट को पीले डस्टबिन में पृथक रूप से संग्रहित करने की समझाइश दी जा रही है। इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए स्वच्छता दीदियां, महिला स्व-सहायता समूह और पंचायत प्रतिनिधि खुद घर-घर पहुंचकर लोगों को कचरा अलग करने की इस पूरी प्रक्रिया को बारीकी से समझा रहे हैं। 

इस जागरूकता अभियान के साथ-साथ अब हर घर, दुकान, होटल, स्कूल और बाजार से नियमित रूप से कचरा संग्रहण किया जाएगा और इसके बदले स्वच्छता शुल्क का नियमित संग्रह होगा। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थलों, सड़कों, नालियों या सूखे स्थानों पर कचरा फेंकने या जल स्रोतों के पास गंदगी फैलाने पर तत्काल जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
इसी मुहिम के तहत विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर जिले की बुरुन्दवाड़ा और बिलोरी पंचायतों ने एक बड़ी मिसाल पेश की है। इन पंचायतों ने विशेष ग्राम सभा आयोजित कर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को पूरी तरह अपनाने, सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने और अपने गांवों को प्लास्टिक-मुक्त गांव बनाने का दृढ़ संकल्प लेकर हरित क्रांति की शुरुआत की है। इस सफल प्रयास को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का सही तरीके से पृथक्करण सुनिश्चित करें ताकि कचरे का सही निपटान कर स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित गांवों का निर्माण किया जा सके।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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