रिपोर्ट: ऋषभ कुमार
रायपुर, 8 मई 2025:
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के लिए विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने रावघाट-जगदलपुर नई रेल लाइन (140 किमी) परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर 3513.11 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जो कि पूरी तरह से केंद्रीय बजट से वहन की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बस्तर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की बहुप्रतीक्षित आशा को साकार करने वाला है।
रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना से पहली बार कोंडागांव और नारायणपुर जैसे पिछड़े जिलों को रेलवे के नक्शे पर स्थान मिलेगा। इससे न सिर्फ यात्रा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आदिवासी अंचलों में व्यापार और रोजगार की भी नई संभावनाएं जन्म लेंगी।
यह रेलमार्ग बस्तर की हरी-भरी वादियों, ऐतिहासिक स्थलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति तक पर्यटकों की सीधी पहुँच को संभव बनाएगा। परिणामस्वरूप, स्थानीय रोजगार और पर्यटन उद्योग को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा।
इस रेललाइन से खनिज संसाधनों के परिवहन, स्थानीय उत्पादों की पहुंच, और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नई दिशा मिलेगी। क्षेत्रीय उद्योगों और किसानों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने में भी यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।
परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण लगभग पूर्ण हो चुका है। इससे संकेत मिलता है कि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होकर निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किया जा सकेगा।
यह परियोजना न केवल भौतिक कनेक्टिविटी, बल्कि सामाजिक समावेशन की दृष्टि से भी क्रांतिकारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में यह रेललाइन विकास की गंगा लेकर आएगी।
गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बस्तर पण्डुम जैसे आयोजनों में भाग लेकर यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि अब बस्तर में नक्सल नहीं, केवल विकास का युग चलेगा।
यह रेल परियोजना केवल एक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क नहीं, बल्कि बस्तर की नई जीवनरेखा है। इससे न केवल कोंडागांव, नारायणपुर, और कांकेर जैसे जिले सीधे जुड़ेंगे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में बुनियादी परिवर्तन आएगा।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता और भावनात्मक प्रतिबद्धता के चलते बस्तर अब राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में आ रहा है। यह परियोजना उस संकल्प का प्रतीक है जो वर्षों से बस्तर की धरती ने संजो कर रखा था।