जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।  जगदलपुर, देहात वार्ड क्रमांक 05 निवासी श्रीमती नागे छह महीने से नामांतरण आदेश के बावजूद रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिला।

प्रकरण क्रमांक 20240215600015 के तहत खसरा नंबर 71/3, रकबा 0.24 हेक्टेयर भूमि के लिए नामांतरण आदेश दिनांक 30 जनवरी 2025 को पारित हुआ था, जिसमें श्रीमती नागे को उनके पति स्व. वीरेंद्र नागे की मृत्यु के बाद विधिक उत्तराधिकारी मानते हुए भूमि उनके नाम दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन आज तक उस आदेश पर अमल नहीं हुआ।

आवेदिका श्रीमती नागे के चार सवाल प्रशासन से:

  1. आदेश के छह महीने बीतने के बावजूद दुरुस्तीकरण क्यों नहीं हुआ?
  2. 30 अप्रैल को आवेदन देने के बाद भी पटवारी की छुट्टी का हवाला देकर कार्य क्यों टाल दिया गया?
  3. सांसद महेश कश्यप द्वारा तहसीलदार श्री रूपेश मरकाम जी को अवगत कराए जाने बाद 30 अप्रैल को मामला पहुँचने के बाद भी प्रशासन निष्क्रिय क्यों है?
  4. गृह मंत्री विजय शर्मा की जनता से “रुपया न देने” की अपील के बावजूद, क्या रिश्वत के बिना काम नहीं होगा?
  5. आवेदिका की ओर से अब आगे की कार्रवाई:

    श्रीमती नागे ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आगामी 7 कार्यदिवस के भीतर रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण नहीं किया गया, तो वे लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत शिकायत दर्ज करेंगी। साथ ही वे आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगेंगी, और जिला कलेक्टर को प्रतिवेदन सौंपेंगी। यदि इन सभी प्रयासों के बाद भी समाधान नहीं हुआ, तो वे जनप्रतिनिधियों और मीडिया के माध्यम से भूख हड़ताल करके संबंधित अधिकारी के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेगी

    उनका कहना है — “मेरा हक है, और इसके लिए अब मैं हर वैधानिक कदम उठाऊंगी। अगर भगवान भरोसे ही सब छोड़ना होता, तो सरकार की सुशासन की जरूरत ही क्या थी?”




    एक वैध नामांतरण आदेश पर भी महीनों तक कार्रवाई न होना केवल श्रीमती नागे का नहीं, बल्कि आम जनता के साथ हो रहे अन्याय का प्रतीक है। यह मामला दर्शाता है कि प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता की कितनी सख्त ज़रूरत है।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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