रिपोर्ट ऋषभ कुमार

एक्सीडेंट में एक पैर चला गया अब ड्यूटी 35 km दूर कैसे करे?

 ताजा मामला दंतेवाड़ा से सामने आया है, जहां एक महिला दिव्यांग शिक्षिका युक्तियुक्तकरण (Rationalisation) के बाद जिला शिक्षा अधिकारी की मनमानी का शिकार हो गई है। मजबूरी में उन्हें अपनी फरियाद बस्तर सांसद महेश कश्यप तक लेकर जानी पड़ी।

 शिक्षिका का कहना है कि सांसद और कलेक्टर महोदय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उनकी नियुक्ति में मानवीय आधार पर राहत दी जाए, लेकिन डीईओ साहब ने निर्देशों को भी नजरअंदाज कर दिया। जवाब में उन्होंने दो टूक कह दिया — “आपको जहां कहा गया है वहीं जाना पड़ेगा, चाहे जो भी आदेश हो!”

 सवाल यह है कि जब एक दिव्यांग महिला शिक्षिका को न्याय पाने के लिए सांसद से लेकर कलेक्टर तक के दरवाजे खटखटाने पड़ें और उसके बावजूद भी उसे राहत न मिले तो फिर आम शिक्षक और कर्मचारी किसके पास जाएँगे?

 क्या डीईओ साहब खुद को सिस्टम से ऊपर समझते हैं?
 क्या नियमों और संवेदनशील मामलों में भी मानवीय दृष्टिकोण खत्म हो गया है?
 दिव्यांग शिक्षकों के हक और सम्मान की सुरक्षा आखिर कौन करेगा?

 दिव्यांग शिक्षक संघ ने भी प्रशासन से गुहार लगाई है कि ऐसे मामलों में मनमानी और उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

️ क्या आप भी इस तरह के किसी अन्याय के शिकार हैं? अपनी आवाज़ बुलंद कीजिए — हम आपके साथ हैं!

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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