
बस्तर ज़िले के बड़े आमाबल शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में पिछले वर्ष 11वीं कक्षा के लिए कृषि संकाय की पढ़ाई शुरू की गई थी। आज ये छात्र 12वीं में पहुँच गए हैं, लेकिन अफसोस कि अब तक स्कूल को कृषि संकाय की आधिकारिक मान्यता ही नहीं मिली!
छात्रों और उनके अभिभावकों ने कई बार जिला शिक्षा अधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन नतीजा सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित रहा। जिम्मेदार अधिकारी बच्चों के भविष्य को लेकर कितने संवेदनहीन हैं, यह इससे साफ़ झलकता है।
इसी तरह की हालात सालेमेटा के हायर सेकेंडरी स्कूल की भी है, जहाँ कृषि संकाय को अभी तक मान्यता नहीं मिल पाई है। हैरानी की बात ये है कि ये दोनों स्कूल छत्तीसगढ़ के वर्तमान वन मंत्री केदार कश्यप के गृहग्राम के आसपास के क्षेत्र में आते हैं। फिर भी शिक्षा व्यवस्था की यह दुर्दशा सवाल खड़े करती है — आखिर शिक्षा के नाम पर बस्तर के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ कौन कर रहा है? क्या यही है सुशासन का असली चेहरा?
ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष लच्छिन बघेल ने जिम्मेदार अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि यदि कृषि संकाय के छात्रों को जल्द मान्यता नहीं मिली तो सैकड़ों बच्चों का साल बर्बाद हो जाएगा और उनका भविष्य अधर में लटक जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल — इस लापरवाही की जवाबदारी कौन लेगा?
क्या बस्तर के छात्र हमेशा ऐसे ही सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ते रहेंगे?
क्या जिला शिक्षा अधिकारी पर होगी कोई कार्रवाई या फिर सब ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
रिपोर्ट: ऋषभ कुमार सम्पादक छत्तीसगढ़ पहट न्यूज