बैंगलोर, 9 जुलाई 2025
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में उभरा है।

भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर के सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी (सीपीपी) की रजत जयंती पर बोलते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि कैसे संस्थागत विकास, सुदृढ़ कानूनों और वित्तीय ढांचे ने भारत की आपदा प्रबंधन प्रणाली को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उन्होंने गुजरात भूकंप भरपाई कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह इससे पूरे देश की आपदा प्रबंधन नीति में बदलाव आया।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि बेहतर पूर्व-चेतावनी प्रणालियों, सशक्त संस्थानों, योजना और संवेदनशील वित्तपोषण ने चक्रवातों और अन्य आपदाओं में मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी सुनिश्चित की है। यह सेंडाई फ्रेमवर्क जैसे वैश्विक मानकों के अनुरूप है।
उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ और भारतीय सशस्त्र बलों ने नेपाल, तुर्की और म्यांमार जैसे देशों में भी समय पर सहायता पहुंचाकर भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत किया है।
आपदा रोधी इन्फ्रास्ट्रक्चर गठबंधन (सीडीआरआई) जैसे नवाचारों का उल्लेख करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह भारत की संस्थागत सोच में वैश्विक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम है।
डॉ. मिश्रा ने भविष्य की चुनौतियों पर भी बल दिया — जैसे शहरी बाढ़, लू और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिम। उन्होंने कहा कि “हमारी आपदा प्रबंधन नीति को सक्रिय, पुनरावृत्त और नवाचारी बने रहना होगा ताकि हर सुधार से लोगों के जीवन में सुरक्षा और अवसर बढ़े।”
इस अवसर पर डॉ. मिश्रा ने आपदा जोखिम वित्तपोषण, सामाजिक सुरक्षा, पारदर्शी राहत वितरण और सामुदायिक जागरूकता को भी भारत की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया।