रिपोर्ट: ओम साहू

बस्तर दशहरा — यह सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि यहाँ की सांस्कृतिक आत्मा है। 75 वर्षों से चला आ रहा यह उत्सव बस्तर की पहचान है जिसमें आदिवासी रीति-रिवाज, रंग-बिरंगे लोक-नृत्य और अनोखी परंपराएं दिखाई देती हैं। नीचे कार्यक्रम, प्रमुख पूजा-विधान और दर्शनीय पलों का संक्षेप दिया जा रहा है — आइए जानें कैसे बनता है यह महान पर्व।

परिचय — बस्तर दशहरा क्या है?

बस्तर दशहरा स्थानीय परंपरा, प्राकृतिक समृद्धि और धार्मिक आस्था का संगम है। यह उत्सव राज्य के लोक-सांस्कृतिक स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है — जहाँ देवी-देवताओं की सत्कार पर पूरा शहर और आसपास के गाँव जुटते हैं।

मुख्य कार्यक्रम और तिथियाँ (संक्षेप)

  • कलश स्थापना पूजा — 22.09.2025 (सभी मंदिरों में)
  • नवरात्रि पूजा और रथ परिक्रमा — 24.09.2025 से 29.09.2025
  • बैल पूजा — 29.09.2025, प्रातः 11:00
  • महाआरती / समापन — 30.09.2025

पाठ यात्रा पूजा

24.07.2025, प्रातः 11:00
ग्राम-समूहों द्वारा आयोजित परंपरागत पाठ यात्रा — स्थानीय विधि अनुसार श्रद्धा से संपन्न होती है।

देरी गड़ाई पूजा

05.09.2025, गुरुवार प्रातः 11:00
गांवों में देवताओं को स्थानीय रीति से स्थापित किया जाता है और समुदायिक भोग अर्पित होता है।

काष्ठन गादी पूजा

21.09.2025
गाँवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुख्य मंदिर तक पहुँचते हैं और गादी पूजा का आयोजन होता है।

रथ परिक्रमा

02–03 अक्टूबर 2025
प्रसिद्ध रथ यात्रा और परिक्रमा के दौरान शहर भर में उमड़ता जन-समूह।

छायाचित्र (मुख्य झलकियाँ)

महत्वपूर्ण: आयोजकों से निवेदन है कि सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा टीम और साफ़-सफ़ाई पर विशेष ध्यान दें। मंदिरों में आग और भीड़ प्रबंध का विशेष प्रावधान आवश्यक है।

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रिपोर्ट: ओम साहू
प्रबंध संपादक — छत्तीसगढ़ पहट / ब्यूरो – Dabang keshri News

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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