जगदलपुर, 3 अक्टूबर 2025 / विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व में सोमवार को वृहद् रस्में आयोजित हुईं।

मुख्य बात: रथ परिक्रमा की अंतिम रस्म ‘बाहर रैनी’ संपन्न हुई — राज परिवार ने माड़िया आदिवासी समुदाय के साथ नवाखानी (नए चावल की खीर) ग्रहण की और विजय रथ की भव्य वापसी हुई।

कार्यक्रम में सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप, महापौर श्री संजय पांडे एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

🛕 परंपरा: रथ चोरी और राजा का मान-मनौव्वल

परंपरा के अनुसार विजयादशमी की रात (भितर रैनी) को माड़िया समुदाय के ग्रामीणों ने आठ-पहियों वाले विशाल रथ को चुरा कर कुम्हड़ाकोट जंगल में छिपा दिया था। यह रस्म उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाती है जब ग्रामीणों ने राजा से असंतोष के चलते रथ उठा ले गये थे।

शुक्रवार दोपहर राज परिवार, राजगुरु और मांझी-मुखिया सम्पूर्ण परंपरागत लाव-लश्कर तथा गाजे-बाजों के साथ कुम्हड़ाकोट पहुँचे और रथ लौटाने हेतु ग्रामीणों के साथ मान-मनौव्वल किया गया।

🌾 नवाखानी से हुआ सद्भाव

माड़िया समुदाय ने रथ लौटाने की शर्त रखी कि राजा उनके साथ नवाखानी खाएँगे — जिसे राज परिवार ने सम्मानपूर्वक स्वीकार कर लिया। सभी ने मिलकर नए चावल की खीर ग्रहण की, जो सामाजिक समरसता और पारंपरिक मेल-जोल का प्रतीक माना गया।

नवाखानी की रस्म के बाद माँ दंतेश्वरी का छत्र विधि-विधान के साथ रथ पर विराजित किया गया और माड़िया समुदाय के उत्साह में विजय रथ को दंतेश्वरी मंदिर के सिंहद्वार तक पहुंचाया गया।

🎉 अंतिम चरण की ओर — 75 दिन का पर्व

बाहर रैनी रस्म के समापन के साथ ही बस्तर दशहरा की रथ परिक्रमा संपन्न हुई। यह 75 दिनों तक चलने वाला पर्व अब आगामी रस्मों — काछन जात्रा और कुटुम्ब जात्रा — के साथ अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है।

📢 न्यूस रिपोर्ट: ओम साहू

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By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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