रिपोर्ट – जय शंकर पांडे



जगदलपुर, 19 जून 2026/ जिले में मानसून के दौरान संभावित अतिवृष्टि एवं बाढ़ आपदा से राहत और बचाव सुनिश्चित करने के लिए बस्तर जिला प्रशासन द्वारा तैयारी पूरी कर ली गई है। कलेक्टर श्री आकाश छिकारा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बाढ़ आपदा प्रबंधन योजना 2026-27 को अंतिम रूप दिया गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में कम से कम समय में त्वरित राहत पहुंचाई जा सके। आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिला कार्यालय जगदलपुर में जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है जो चैबीसों घंटे चालू रहेगा। आम नागरिक किसी भी आपात स्थिति में दूरभाष नंबर 07782-223122 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आपातकालीन पुलिस सहायता केंद्र के नंबर 112 पर भी तत्काल सूचना दी जा सकती है। समन्वय को बेहतर बनाने के लिए जिला स्तर पर राजस्व शाखा, अनुविभागीय अधिकारियों और सभी तहसीलदारों के मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं ताकि हर स्तर पर त्वरित संदेशों का आदान-प्रदान संभव हो सके।



बाढ़ नियंत्रण समिति ने जिले से होकर गुजरने वाली इंद्रावती नदी के जल स्तर पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, जिसका वार्निंग लेवल 7 मीटर तथा डेंजर लेवल 8.30 मीटर निर्धारित किया गया है। नदी में जलभराव या ओडिशा के खातीगुड़ा डैम से पानी छोड़े जाने की स्थिति पर केंद्रीय जल आयोग के साथ मिलकर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि समय रहते मैदानी इलाकों को सचेत किया जा सके। प्रशासन ने संभावित रूप से प्रभावित होने वाले संवेदनशील विकासखंडों के अंतर्गत बकावण्ड के तारापुर, बनियागांव, बजावण्ड एवं बेलगांव सहित जगदलपुर के धनपुंजी, नगरनार, भेजापदर तथा लोहंडीगुड़ा के टाकरागुड़ा, बडांजी, कुम्हली और बस्तर तहसील के बड़े चकवा, पटेलपारा जैसे दर्जनों गांवों को पहले से चिन्हित कर लिया है।

बाढ़ प्रभावितों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए कई प्राथमिक शाला भवनों, धर्मशाला और सामुदायिक केंद्रों को राहत शिविर स्थल के रूप में आरक्षित किया गया है। इन सभी शिविरों के लिए विशेष नोडल अधिकारियों और प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो वहां रहने वाले लोगों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, बिजली और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। महामारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों में ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन टैबलेट का छिड़काव करवाएं। इसके साथ ही आपदा के दौरान गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कटने की स्थिति के मद्देनजर पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न, मिट्टी तेल और डीजल का अग्रिम भंडारण करने के निर्देश खाद्य नियंत्रक को दिए गए हैं।

सुरक्षित आवागमन और बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए लोक निर्माण विभाग और वन विभाग को सड़कों पर जलभराव या पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में तत्काल वैकल्पिक मार्ग या चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्युत विभाग भी मानसून से ठीक पहले पेड़ों की छंटाई और ढीले तारों को दुरुस्त करने में जुट गया है ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो। रेस्क्यू ऑपरेशन को गति देने के लिए नगर सेना और जिला सेनानी को नावों, लाइफ जैकेट और अन्य बचाव उपकरणों की मॉकड्रिल कर उन्हें तैयार रखने को कहा गया है। जिला प्रशासन द्वारा आम जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की आपदा या जलभराव की स्थिति में घबराएं नहीं और तुरंत कंट्रोल रूम नंबरों पर सूचना देकर सक्रिय सहयोग करें।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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