रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

बीजापुर 26 जुलाई 2026- जिले में शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विशेष पहल की जा रही है। कलेक्टर विश्वदीप एवं जिला पंचायत सीईओ  नम्रता चौबे के निर्देशन में नक्सल प्रभावित और अंदरूनी क्षेत्रों के 09 से 14 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 1200 बालक-बालिकाओं की पहचान कर उन्हें आवासीय पोर्टा केबिनों में प्रवेश दिलाया गया है।


ये ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने गांव में स्कूल की सुविधा नहीं होने, घरेलू कार्यों या नक्सल प्रभावित परिस्थितियों के कारण बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी अथवा कभी स्कूल ही नहीं जा सके। शिक्षकों, अधीक्षकों और अनुदेशकों के सहयोग से इन बच्चों को विद्यालयीन वातावरण के अनुरूप ढालने के लिए प्रारंभिक दिनों में टीवी, भ्रमण, खेलकूद, नृत्य, क्राफ्ट और चित्रकला जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।


अब इन बच्चों की शैक्षणिक क्षमता का आकलन कर उनकी उपयुक्त कक्षाओं का निर्धारण करने के लिए तीन माह का ब्रिज कोर्स संचालित किया जाएगा। इस दौरान बच्चों के पूर्व ज्ञान का मूल्यांकन करते हुए बुनियादी भाषा कौशल और संख्या ज्ञान को मजबूत किया जाएगा। ब्रिज कोर्स पूर्ण होने के बाद परीक्षा लेकर बच्चों के शैक्षणिक स्तर के अनुसार उन्हें उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा।


इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ  नम्रता चौबे ने जिला शिक्षा अधिकारी, डीएमसी, सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, बीआरसी एवं संकुल समन्वयकों की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि ब्रिज कोर्स से जुड़े बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन-अध्यापन तथा भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे सहज रूप से शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।


जिला शिक्षा अधिकारी  राजेश पांडेय ने कहा कि वर्षों बाद बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ रहे हैं। इन बच्चों को विशेष देखभाल और अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता है तथा प्रशासन की मंशा के अनुरूप उनके समग्र विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

By संपादक–ऋषभ कुमार

a seniour journalist from bastar division working since 2008

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