रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

जगदलपुर, 27 जुलाई 2026/ आधुनिक कृषि उपकरणों से किसानों को अब खेती-किसानी के लिए काफी सहूलियत मिल रही है और बस्तर के किसान भी इन उन्नत कृषि यंत्रों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं जो किसानों के लिए श्रमिकों की किल्लत को दूर करने में सहायक साबित हो रहे हैं ।इसे रेखांकित करते हुए तोकापाल विकासखण्ड के बड़ेमारेंगा निवासी किसान चंदन कश्यप कहते हैं कि मानसून आते ही धान बुवाई कार्य को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। वजह थी—उनकी 17 एकड़ कृषि भूमि में धान रोपाई के लिए मजदूरों का न मिलना।
हर साल रोपाई का मौसम आते ही चंदन को ट्रैक्टर लेकर 8 से 12 किलोमीटर दूर केसापुर, चिंगपाल और मावलीपदर जैसे गांवों के चक्कर काटने पड़ते थे। दिन भर में चार-चार बार आने-जाने में न केवल डीजल का धुआँ उड़ता और बहुमूल्य समय बर्बाद होता, बल्कि मजदूरों की व्यवस्था करने में मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता था। इस भारी भागदौड़ और सात से आठ हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से केवल मजदूरी पर ही उनके डेढ़ लाख रुपये स्वाहा हो जाते थे। कमाई तो बाद की बात थी, रोपाई की शुरुआत में ही जेब खाली हो जाती थी। लेकिन इस बार एक नई क्रांति की शुरुआत हुई। हर साल की इस किल्लत और आर्थिक बोझ से तंग आकर चंदन कश्यप ने एक साहसिक कदम उठाया।
उन्होंने सदियों पुराने पारंपरिक तरीके को दरकिनार करते हुए पहली बार ‘पैडी ट्रांसप्लांटर’ यानी धान रोपाई मशीन को अपने खेतों में उतारने का फैसला किया। जैसे ही छोटी सी पेट्रोल चालित मशीन ने कीचड़ से सने खेतों में कदम रखा, गाँव के सारे समीकरण ही बदल गए। दूर-दराज के गाँवों से मजदूर लाने की मजबूरी हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गई। परिवार के ही 4 से 5 सदस्यों ने कंधे से कंधा मिलाया और मशीन थामकर पूरे 17 एकड़ खेत में रोपाई का कार्य संभाल लिया। देखते ही देखते, जलभराव वाले एक-डेढ़ एकड़ के छोटे से हिस्से को छोड़कर पूरी ज़मीन पर हरी-भरी पौध की सलीकेदार कतारें सज गईं।
जब रोपाई का काम पूरा हुआ और चंदन ने कुल खर्च का हिसाब लगाया, तो उनकी आँखें खुशी से चमक उठीं। जहाँ पहले डेढ़ लाख रुपये सिर्फ मजदूरी में बह जाते थे, वहीं इस बार केवल पेट्रोल का मामूली सा खर्च आया और सीधे तौर पर लगभग 1 लाख रुपये की भारी-भरकम बचत हो गई।
चंदन कश्यप का यह अनुभव अब केवल उनकी निजी सफलता तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे बस्तर अंचल के किसानों के लिए एक मिसाल बन गया है। अब क्षेत्र के किसान उनके खेत में आकर इस आधुनिक धान रोपाई मशीन के उपयोग को देखकर भविष्य में स्वयं भी उक्त मशीन का उपयोग करने की बात कहते हैं। चंदन कश्यप के खेत में गूंजती धान रोपाई मशीन की आवाज दरअसल इस बात का शंखनाद है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाने का साहस दिखाए, तो खेती न केवल आसान हो सकती है बल्कि लागत घटाकर अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है।