रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

लोहंडीगुड़ा ,13 अगस्त 2026/ भारतीय किसान यूनियन टिकैत जिला बस्तर के नेतृत्व में लौंडीगुड़ा ब्लॉक के सागर गांव पंचायत के भुर्जीपारा में किसानों की आम पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में क्षेत्र के किसान, मजदूर, युवा एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए और अपने हक-अधिकार की आवाज बुलंद की।
किसान पंचायत में ग्रामीणों ने खाद-बीज, शिक्षा, आंगनबाड़ी, सड़क, पानी तथा गांव की अन्य मूलभूत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। किसानों ने कहा कि वर्षों से ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। अब किसान केवल आश्वासन सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।
“हक चाहिए तो संघर्ष करना होगा”—रमेश गोयल

भारतीय किसान यूनियन टिकैत जिला बस्तर के जिला अध्यक्ष रमेश गोयल ने पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि किसान और ग्रामीण अगर आज भी संगठित नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने कहा, “जल, जंगल और जमीन हमारी पहचान है। हमारी जमीन, हमारे प्राकृतिक संसाधन और हमारे अधिकारों पर किसी भी प्रकार का संकट आया तो भारतीय किसान यूनियन टिकैत चुप नहीं बैठेगी। खाद और बीज किसानों की जरूरत हैं, कोई विलासिता नहीं। किसान को अपनी मेहनत से खेती करने के लिए खाद-बीज भी संघर्ष करके लेना पड़े, यह व्यवस्था की विफलता है।”

रमेश गोयल ने कहा कि सरकार और प्रशासन को किसानों की आवाज को गंभीरता से लेना होगा। गांव की समस्याओं को नजरअंदाज करने की नीति अब नहीं चलेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण नहीं किया गया तो भारतीय किसान यूनियन टिकैत गांव-गांव में किसान पंचायत आयोजित कर संगठित आंदोलन खड़ा करेगी।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि “अकेला किसान कमजोर हो सकता है, लेकिन हजारों किसान एकजुट हो जाएं तो उनकी आवाज को कोई दबा नहीं सकता। हमें जाति, धर्म और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर किसान, मजदूर और आम जनता के अधिकारों के लिए एकजुट होना होगा।”गांव की समस्याओं को लेकर संगठन ने लिया संघर्ष का संकल्प पंचायत में ग्रामीणों द्वारा रखी गई प्रत्येक समस्या को भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने गंभीरता से लिया और संबंधित विभागों एवं प्रशासन के समक्ष समस्याओं को उठाकर उनके निराकरण के लिए संघर्ष करने का भरोसा दिलाया।
किसान पंचायत में यह भी निर्णय लिया गया कि संगठन का विस्तार गांव-गांव तक किया जाएगा और अधिक से अधिक किसानों, मजदूरों एवं युवाओं को संगठन से जोड़ा जाएगा। स्थानीय समस्याओं को लेकर आगे चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
जिला अध्यक्ष रमेश गोयल ने कहा कि “अब सिर्फ आवेदन और ज्ञापन देने तक संगठन सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ी तो किसानों के अधिकार के लिए सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया जाएगा। किसान की आवाज को दबाने की कोशिश हुई तो आंदोलन और तेज होगा।”
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल, सड़क, खाद-बीज और अन्य मूलभूत सुविधाएं ग्रामीणों का अधिकार हैं। इन सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को बार-बार संघर्ष करने की स्थिति को समाप्त करना होगा।
किसानों की एकजुटता ही आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत
पंचायत में उपस्थित किसानों ने संगठन के साथ मजबूती से खड़े रहने तथा गांव की समस्याओं को लेकर सामूहिक रूप से संघर्ष करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने स्पष्ट किया कि बस्तर के किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों की आवाज को गांव से जिला स्तर तक और आवश्यकता पड़ने पर शासन-प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा।
इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन टिकैत संभागीय अध्यक्ष शिवा स्वर्णकार, जिला उपाध्यक्ष अनिल सिंह, जिला सचिव रूपेंद्र कश्यप, जिला उपाध्यक्ष जयंत राम साहू, किसान यूनियन सदस्य राजेंद्र मांडवी, लच्छिन कश्यप सहित बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, युवा एवं ग्रामीण साथी उपस्थित रहे।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत का संकल्प
“किसान की लड़ाई कमजोर नहीं होगी,
किसान की आवाज दबाई नहीं जाएगी।
जल-जंगल-जमीन के अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी।
खाद-बीज और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी रहेगा।